image: Uttarakhand STF exposed the fraud of 250 crores

उत्तराखंड: 250 करोड़ की ‘महाठगी’ का खुलासा, विदेश से जुड़े ठगों के तार..जानिए पूरी खबर

इस गिरोह ने करीब ढाई सौ करोड़ रुपए की ठगी अब तक की है। बताया गया है कि इस गिरोह ने एक ऐप तैयार की थी।
Jun 8 2021 7:27PM, Writer:Komal Negi

उत्तराखंड से एक बड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में एसटीएफ को बड़ी सफलता हासिल हुई है। साइबर क्राइम के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है जहां करीब ढाई सौ करोड़ रुपए की ठगी का खुलासा हुआ है। जी हां उत्तराखंड एसटीएफ ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो 15 दिन में पैसा दोगुना करने का लालच देता था। इस गिरोह ने करीब ढाई सौ करोड़ रुपए की ठगी अब तक की है। बताया गया है कि इस गिरोह ने एक ऐप तैयार की थी। इस ऐप को देशभर में करीब 50 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था। मामले में एक मुख्य आरोपी पवन पांडेय नोएडा से गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से 19 लैपटॉप, 542 सिम कार्ड, 5 मोबाइल फोन, 4 एटीएम और एक पासपोर्ट बरामद हुआ है। एसटीएफ की जांच में पता चला है कि यह धनराशि क्रिप्टो करेंसी में बदल कर विदेशों में भेजी जा रही थी। साइबर अपराधी ने पावर बैंक नाम की एक ऐप के माध्यम से पैसे इन्वेस्ट करने पर 15 दिन में दोगुना करने का लालच आम जनता को दिया था। आम जनता से ही करोड़ों की धनराशि कमा कर वह इस धोखाधड़ी को अंजाम दे चुके थे। दरअसल पुलिस को एक लीड मिली थी। आगे पढ़िए

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हरिद्वार के श्यामपुर के रहने वाले रोहित कुमार ने साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन को प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें उसने बताया कि उसके दोस्त ने उसे पावर बैंक एप की जानकारी दी है। है इसमें पैसे इन्वेस्ट करने पर 15 दिन में पैसे दोगुने आते हैं। इसके बाद रोहित कुमार द्वारा भी पावर बैंक एप डाउनलोड की गई और अलग-अलग तिथियों में 91200 और 73000 रुपये जमा कराए गए। इसके बाद ही रोहित कुमार को ठगी का अहसास हो चुका था। उधर पुलिस को भी एक बड़े साइबर क्राइम रैकेट का अंदेशा मिल गया था। इसके बाद पुलिस लगातार छानबीन में जुटी रही साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा सभी खातों की टेक्निकल जांच की गई तो पेटीएम बैंक का खाता ही प्रमुख संदिग्ध खाता लगा। इसका संचालन पवन कुमार पांडेय के द्वारा किया जा रहा था जो कि नोएडा में रह रहा था। जब पूरी जांच की गई तो सभी के हाथ पांव फूल गए। क्योंकि अलग-अलग खातों से करीब ढाई सौ करोड रुपए की धनराशि की धोखाधड़ी की बात सामने आई। यह बात भी सामने आई कि कुछ विदेशी बिजनेसमैन भारत में कुछ निवेशकों से दोस्ती करते हैं और उसके बाद अलग अलग व्यापार के नाम पर कमीशन देने के नाम पर उन्हें जोड़ते हैं। आज मैं यह भी पाया गया कि इस धनराशि को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेशी राष्ट्रों में भेजा जा रहा था। इस तरह से यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह चल रहा था।


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