image: Uttarakhand culture news-0317

अपनी संस्कृति को पहचानिए...बाबुल के आंगन का प्यार है ‘भिटौली’

Mar 4 2017 9:23PM, Writer:

शादी वो घड़ी है जो हर किसी लड़की के जीवन के लिए सबसे हसीन पल होता है । ढेरों खुशियों लेकर आता है । मायके का जिक्र आते ही हर लड़की के जेहन में उसके बाबुल के आंगन की छवि उभर जाती है । भाई-बहनों के साथ की गई अठखेलियां उसकी आंखों के सामने उभरने लगती है । मानों अभी कल की ही तो बात हो । और फिर आता है चैत्र का महीना जो हर शादीशुदा लड़की को लाकर देता है मायके का प्यार भिटौली। अब ऋतु रमणी ऐ गे ओ चैत क मेहना...भेटोई की आ, लगे आज सौरास की बैन ।

लोक परम्पराओं के प्रदेश उत्तराखंड में ऐसे कई त्यौहार हैं, जो मैदानी इलाकों में नहीं मनाए जाते, भिटौली भी उनमें से एक है । कई लोग इसे भिटोई भी कहते हैं। भिटौली जिसका अर्थ होता है भेंट करना यानि मुलाकात । इस त्योहार को मानने की परंपरा सालों से प्रचलित है । विवाहित लड़की के मायके वाले चैत्र के महीने में अपनी बेटी और बहन की ससुराल में जाकर मुलाकात करते हैं और साथ में उपहार भी देते हैं । शादी के बाद की पहली भिटौली लड़की को वैशाख के महीने में दी जाती है और उसके बाद हार साल चैत्र मास में दी जाती है। जब भिटौली लेकर मायके वाले पहुंचते हैं, तो उस सामग्री को पास-पड़ोस में बांटा जाती है, तब ये माहौल किसी त्यौहार से कम नहीं लगता। लड़की चाहे कितने भी सम्पन्न परिवार में क्यों ना ब्याही हो, उसे अपने मायके के आने वाली भिटौली का बेसब्री से इंतजार रहता है । इस वार्षिक सौगात में उपहार स्वरूप दी जाने वाली वस्तुओं के साथ ही उसके साथ जुड़ी शुभकामनाएं, आशीर्वाद और ढेर सारा प्यार और दुलार विवाहिता तक पहुंच जाता है।


  • MORE UTTARAKHAND NEWS

View More Latest Uttarakhand News
  • TRENDING IN UTTARAKHAND

View More Trending News
  • More News...

News Home