यहां बारूद की होली खेली जाती है, ऐसी होली शायद ही आपने ने देखी होगी !
Mar 16 2017 11:09AM, Writer:हैदर अली खान
उदयपुर- यूं तो आपने रंगों के त्यौहार होली पर होली खेलने के कई अंदाज देखे होंगे। लेकिन उदयपुर के मेनार गांव में खेली जाने वाली ऐसी होली शायद ही आपने कहीं देखी होगी। होली के दूसरे दिन यहां बारूद की होली खेली जाती है। आधी रात को जब पूरा सूबा सोता है तो यहां के लोग हाथों में लहराते बंदू लेकर घरों से बाहर निकते हैं, और बंदूकों की साथ देती हैं वो तोपें जो कभी राजा महाराजाओं का जंग में साथ दिया करती थीं। साथ ही हाथ में होली खेलने के लिए बारूद का जानलेवा जखीरा होता है। यहां बारूद और बंदूक के ट्रिगर के साथ खेली जाने वाली होली कि ये परंपरा सदियों पुरानी है। ये वो परंपर है, जिसे निभाने के लिए मोनार गांव के लोग दुनियां में कहीं भी रहें इस दिन अपने गांव खिंचे चले आते हैं। इस मौके पर बंदूक धारियों की टोली गांव के चौपाल पर इकट्ठा होती है। दो टोलियां आमने-सामने होती हैं, और फिर बमबारी से पूरा इलाका गूंज उठता है। इस हैरतअंगेज परंपरा को देखने के लिए क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या महिलाएं, हर कोई यहां आता है, और इस बारूदी होली का हिस्सा बन जाता है। गांव के लोग कहते हैं, मुगल काल में महाराणा प्रताप के पिता उदयसिंह के समय मेनारिया ब्रह्माण ने युद्ध कर मेवाड़ राज्य की रक्षा की थी। उस दिन की याद में इस त्योहार को यहां मनाया जाता है। गांव के लोग उस गौरवशाली दिन को याद करते हुए होली के दूसरे दिन पूरी रात बारूद की होली खेलते हैं, और जश्न मनाते हैं।