उत्तराखंड का सबसे रहस्यमयी मंदिर...यहां है नागराज का निवास !
Mar 28 2017 9:33PM, Writer:मीत
शनि शिंगनापुर, त्र्यंबकेश्वर, सबरीमाला, कोल्हापुर महालक्ष्मी मन्दिर, बांकेबिहारी जैसे मंदिरों में जहां महिलाओं और पुरूष के बीच किए जा रहे भेदभाव को लेकर माहौल गर्म है, वहीं देश में ऐसा भी एक मंदिर हैं, जहां महिला और पुरुष किसी भी श्रद्धालु को मंदिर के अन्दर जाने की इजाजत नहीं है। इस मंदिर में किसी VIP की भी नहीं चलती है। यहां तक कि इस मंदिर के पुजारी की भी नहीं चलती। पुजारी को आंख, नाक और मुंह पर पट्टी बांध कर देवता की पूजा करनी पड़ती है। इसके अलावा श्रद्धालु इस मंदिर परिसर से लगभग 70 फीट की दूरी पर खड़े होकर पूजा करते हैं। ये मन्दिर उत्तराखंड के चमोली जिले में वांण नाम की जगह पर स्थापित है। राज्य में ये मंदिर लाटू मंदिर नाम से विख्यात है। यहां लाटू देवता की पूजा होती है। इतिहासकारों के मुताबिक लाटू देवता उत्तराखंड की आराध्य नंदादेवी के धर्म भाई हैं। वांण गांव नंदा देवी की राजजात यात्रा का बारहवां पड़ाव है।
वांण गांव से लाटू देवता वांण अपनी बहन नंदा देवी की अगवानी करते हैं। इस मंदिर के कपाट साल में एक ही दिन यानी वैशाख माह की पूर्णिमा को खुलते हैं और पुजारी आंख-मुंह पर पट्टी बांधकर कपाट खोलते हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर के भीतर साक्षात रूप में नागराज अपनी अद्भुत मणि के साथ वास करते हैं, जिसे देखना आम लोगों के वश की बात नहीं । इस वजह से पुजारी भी आंख पर पट्टी बांधते हैं। लोगों का ये भी कहना है कि मणि की तेज रौशनी की चुंधियाहट किसी भी इन्सान को अंधा बना देती है। लोग ये भी कहते हैं कि ना तो पुजारी के मुंह की गंध देवता तक और ना ही नागराज की विषैली गंध पुजारी की नाक तक पहुंचनी चाहिए। इसलिए वे नाक-मुंह पर पट्टी लगाते हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि उत्तराखंड का लाटू बाबा का मंदिर अपने रहस्यों की वजह से अनसुलझी पहले है।