उत्तराखंड में है ‘संजीवनी बूटी’ वाला दिव्य पर्वत...21 मई को कोई एक हासिल करेगा ‘अमरत्व’ !
Mar 29 2017 8:55PM, Writer:प्रगति
माना जाता है कि त्रेतायुग में राम-रावण युद्ध के दौरान मेघनाद ने अपनी शक्तियों से लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया था। तब उनके प्राण बचाने के लिए पवनपुत्र हनुमान संजीवनी बूटी ढूंढने आए थे और हिमालय पहुंचकर जब संजीवनी बूटी नहीं खोज पाए तो द्रोणागिरी पर्वत का एक भाग ही लंका ले गए थे जिसके बाद लक्ष्मण के प्राण बचे थे। रामायण काल के संजीवनी बूटी वाले प्रसंग को आज फिर याद किया जा रहा है क्योंकि उत्तराखंड सरकार ने चमोली जिले के जुम्मा- द्रोणागिरी ट्रैक को “ट्रैक ऑफ द ईयर” के लिए चुना है। इस कार्यक्रम की शुरुआत 21 मई से हो रही है। इस ट्रैकिंग कार्यक्रम में दुनिया भर के पयर्टक, धर्म और आस्था से जुटे लोग हिस्सा लेंगे। 21 मई से शुरू होने वाली ट्रैकिंग को सफल बनाने के लिए अधिकारियों ने भी कमर कस ली है।
ट्रैकिंग के नोडल अधिकारी अपर आयुक्त हरक सिंह रावत ने जिलास्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने 10 मई तक जल संस्थान, पेयजल निगम, ऊर्जा निगम, लोनिवि और विकास विभाग के अधिकारियों को ट्रैकिंग रूट पर पैदल रास्तों, शौचालयों, पेयजल और बिजली व्यवस्था चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर भी जोर दिया । द्रोणागिरी गांव में बिजली सुविधा पहुंचाने, दूरसंचार सेवाएं पहुंचाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए। इस कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड सरकार आपको उस संजीवनी बूटी वाले गांव को जानने को मौका दे रही है जिसने कभी दशरथपुत्र लक्ष्मण को नई जिंदगी दी थी।ट्रैकिंग के दौरान आपको 'द्रोणागिरी गांव की संस्कृति, यहां के लोगों की जीवनशैली साथ ही कई तरह की जडी बूटियों के बारे में जानकारी मिलेगी ।