‘जय मां गंगा’...उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला ...गंगा को गंदा किया तो जेल होगी !
Mar 30 2017 5:29PM, Writer:मीत
गंगा किनारे बसे होटल, कारखानों, आश्रमों पर गाज गिरने जा रही है। उत्तराखंड हाईकोर्ट में गंगा की सफाई में खलल डाले रहे ऐसे होटल, कारखानों और आश्रमों को सील करने के आदेश दे दिेए हैं। ये आदेश उत्तराखंड के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को दिया गया है। आपको यहां ये भी बता दें कि कोर्ट ने इससे पहले गंगा नदीं को जीवित नदी का दर्जा दिया था। 20 मार्च को एक केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि गंगा नदी देश की पहली जीवित नदी है । इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि गंगा नदी को वो सारे हक मिलने चाहिए, जो किसी इंसान को मिलते हैं। यानी कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर कोई गंगा को गंदा करेगा तो उस पर उस हिसाब से कार्रवाई भी की जाएगी, जो किसी इंसान को नुकसान पहुंचाने पर की जाती है।
कोर्ट द्वारा किसी नदी को ये दर्जा देने का दुनिया में ये दूसरा मामला है। इससे पहले न्यूजीलैंड की संसद ने एक नदी को ऐसा दर्जा दिया था। आपको बता दें कि कोर्ट में नदी किनारे पत्थर तोड़े जाने के खिलाफ दायर एक केस की सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान कोर्ट ने गंगा नदी को जीवित नदी कहा था। कोर्ट ने कहा था कि गंगा को भारत के धर्मग्रंथों में सबसे पवित्र नदी का दर्जा मिला है। इसलिए इस नदी को जिंदा नदी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि गंगा को जिंदा नदी का दर्जा मिलने का मतलब है कि गंगा को अब वो अधिकार मिलेंगे जो किसी इंसान को देश का कानून और संविधान देता है। कहा जा सकता है कि कोर्ट ने इस मामले में अब बड़ा फैसला सुनाया है। इसके साथ ही कोर्ट ने साफ कर दिया है कि गंगा के किनारे बने होटल, आश्रमों और कारखानों को तुरंत सील किया जाए।