image: The fort of mordhwaj-0417

उत्तराखंड से उठी थी ‘हिंदुत्व’ की लहर…इसका सबूत है ‘मोरध्वज’ का किला...अपनी मिट्टी से जुड़िए !

Apr 3 2017 9:36AM, Writer:मीत

देवभूमि उत्तराखंड कई लोगों के लिए शिव की नगरी है, किसी के लिए वैष्णवों का ही धार्मिक स्थल है। लेकिन क्या जानते हैं कि यहां बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने भी बौद्ध धर्म को खूब प्रचारित किया था। पांचवी शताब्दी तक बौद्ध धर्म यहां के भाबर क्षेत्र में भी खूब प्रचारित किया गया जिसके निशान यहां आज भी देखने को मिलते है। बौद्ध धर्म के एक ऐसे ही मठ से आज हम आपको रुबरु करवा रहे जो पहले हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र रहा लेकिन बाद में इस पर बौद्ध धर्म के अनुनायियों ने अपना अधिपत्य स्थापित किया। जिसके अवशेष आज भी कहीं ऐतिहासिक गूढ रहस्यों को अपने में समेटे हैं। कोटद्वार से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर बिजनौर जिले की नजीबाबाद तहसील में पडता है पौराणिक मोरध्वज किला ।

ये किला आज भी अपने आप में कहीं हिन्दू और बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक गूढ रहस्यों को अपने में दफन किये हुऐ है। दरअसल प्राचीन काल में शिव भक्त मोरध्वज नाम के एक हिन्दू राजा ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिऐ इस किले का निर्माण करवाया था। जिसके अवशेष इस किले की खुदाई के दौरान मिले देवी देवताओं की मूर्ति के रुप में प्रमाणिक करते है। अभी कुछ साल पहले ही इसी गांव के पास एक विशाल काय शिवलिंग के रुप में निकली एक आकृति ने इस बात की प्रामणिकता पर और बल दिया कि ये किला पौराणिक काल में शिव भक्तों की आराधना का प्रमुख केन्द्र था। जिसकी अब यहां के ग्रामीण मंदिर में प्राण प्रतिष्ठ की योजना बना रहे है।


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