देवबंद के मौलाना का बयान...मुस्लिम महिलाओं का नौकरी करना इस्लाम के खिलाफ
Apr 3 2017 5:17PM, Writer:Riteish
तीन तलाक को लेकर बहस चल ही रही है कि देवबंद के एख मौलाना ने एक और विवादित बयान दिया है। इस बयान के जरिए उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को घर की चारदीवारी में कैद करने की मानसिकता का परिचय दिया है। देवबंद के मौलाना और तंजीम उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष नदीम उल वाजदी ने मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों के नौकरी करने पर बयान दिया है। मौलाना वाजदी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को सरकारी या प्राइवेट किसी भी तरह की नौकरी नहीं करनी चाहिए. मुस्लिम महिलाओं का नौकरी करना इस्लाम के खिलाफ है। मौलाना वाजदी का कहना है कि घर का खर्च उठाने की जिम्मेदारी मर्दों की होती है। महिलाओं का काम घर और बच्चों की देखभाल करना है।
देवबंद के मौलाना वाजदी ने कहा कि अगर घर में कमाने वाला कोई मर्द नहीं है तो महिलाओं का नौकरी करना ठीक है। लेकिन उस सूरत में भी महिलाओं को अपना चेहरा ढक कर काम करना होगा। मौलाना वाजदी के इस बयान के बाद से मुस्लिम महिलाओं में गुस्सा है। वहीं सियासत भी शुरू हो गई है। एक तरफ केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी दिलाने की बात करती है तो वहीं दूसरी तरफ वाजदी जैसे लोग हैं जो महिलाओं को घरों की चारदीवारी में कैद करके रखना चाहते हैं। मौलाना साहब को शायद ये अंदाजा नहीं है कि दुनिया कितनी बदल चुकी है। मुस्लिम समाज की कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठने लगी है। बता दें कि देवबंद पहले से ही अपनो फतवों के कारण बदनाम रहा है। मुस्लिमों के मुखिया होने का दावा करने वाले लोग हर बात पर फतवा जारी कर देते है।