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इस्लाम में भी ‘गाय’ माता है...ये रहा सबूत...राष्ट्रविरोधियों के लिए तमाचा है ये खबर !

Apr 5 2017 4:28PM, Writer:मीत

देशभर में गाय बहस का मुद्दा है लेकिन आज हम आपको बताते हैं कि किस तरह से इस्लाम में भी गाय को माता का रूप कहा गया है। इस्लाम और पैगम्बर साहब हमेशा गाय को आदर की नजर से देखते थे | हजरत मोहम्मद साहब लिखते हैं कि गाय का दूध बदन की खूबसूरती और तंदुरुस्ती बढाने का बड़ा जरिया है। इसके साथ ही इस्लाम में कहा गया है कि गाय का दूध और घी तंदुरुस्ती के लिए बहुत जरूरी हैं। बड़ी बात तो ये है कि इस्लाम में कहा गया है कि गाय का मांस बीमारी पैदा करता है, जबकि उसका दूध भी दवा है। कुरान शरीफ में लिखा गया है कि गाय जिस घर में रहती है, वहां दौलत बरसती है। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि जब भारत में इस्लाम का प्रचार शुरू हुआ, तब गौ रक्षा का प्रश्न भी सामने आया, इसे सभी मुस्लिम शासकों ने समझा और उन्होंने फरमान जारी किया था कि गाय और बैल का कत्ल बंद करवाया जाए। इस्लाम कहता है कि गाय नहीं मारना चाहिए ऐसा करना हदीस के खिलाफ हैं |

ये बात मौलाना हयात सा और खानखाना हाली समद सा ने कही थी। इतिहास गवाह है कि बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां जैसे शासकों ने गाय की क़ुरबानी बंद करवाई थी। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी हाकिम अजमल खान का कहना था कि ना तो कुरान और ना ही अरब कि प्रथा है की गाय कि क़ुरबानी हो। साल 1922 में मौलाना अब्दुल बीरा सा ने गाय कि क़ुरबानी बंद करवाई थी तो महात्मा गांधी ने उसका स्वागत किया था | मोहम्मद साहब कहते हैं कि गाय का दूध-घी शिफा यानीदवा है और गौमांस बीमारी है। मुस्लिम धर्मगुरुओं का मानना है कि जिस देश में रहते हो उसके कानून का पालन करना चाहिए और पडोसी को दुख पहुंचाना पाप है। यहां आपको ये भी बता दें कि बाबर से लेकर बहादुर शाह जफ़र तक के शासन काल में गोहत्या प्रतिबंधित थी। यहां तक कि बहादुर शाह जफर ने खुद मुनादी कराई थी कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी करने वाले को तोप से उड़ा दिया जायेगा। देवबंद के फतवे का सार है कि गो हत्या करने वाले के खिलाफ कयामत वाले दिन मोहम्मद साहब गवाही देंगे।


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