उत्तराखंड में जानलेवा लापरवाही...जिंदगी और मौत के बीच फंसी 60 जिंदगियां !
Apr 8 2017 3:17PM, Writer:मीत
उत्तराखंड में ये क्या हो रहा है ? क्या किसी की जान को किसी की कोई फिक्र नहीं है? जहां देखिए वहां लापरवाही हो रही है। हर तरफ रुपया कमाने की होड़ लगी है। इस बीच किसी की जान भी चली जाए तो किसी को फर्क नहीं पड़ता। बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर देवभूमि में ये क्या हो रहा है ? क्या विकास के नाम पर लोगों की जान से खेला जा रहा है। क्या चंद रुपयों के आगे लोगों की जान की कोई परवाह नहीं हैं। अगर ऐसा है तो फिर सरकार को इस बारे में जवाब देना पड़ेगा। उत्तराखंड के श्रीनगर में जो हुआ वो सच में हैरान कर देने वाला है। ये वो घटना है, जिसमें कई लोगों की जान पर बन आई थी। वो तो शुक्र मनाइए कि एक बड़ी घटना होने से बच गई। वरना आज श्रीनगर में त्राहिमाम मचा होता और हंगामा मचा होता। लेकिन सवाल ये भी है कि क्या किसी बड़ी घटना होने के बाद ही हम लोग जाएंगे। आइए अब आपको बिना देर किए हुए इस बड़ी खबर के बारे में बता देते हैं।
हम आपके लिए एक बड़ी खबर लेकर आए हैं। ये खबर उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल से आ रही है। पावर प्रोजेक्ट बना रही कंपनी GVK की मनमानी कम होने के नाम नहीं ले रही है। परियोजना अपनी मनमर्जी से बिना किसी पहले सूचना के बांध का पानी छोड़ रहा है, जिससे लोगों की जान पर बन आ रही है। ऐसा ही कुछ हुआ 60 लोगों के साथ, दरअसल कुछ लोग अपने परिचित का दाह संस्कार करने नदी किनारे घाट पर गए थे, जब वे घाट पर गए थे तो नदी मे नाम मात्र का पानी था। लेकिन कुछ देर में ही नदी का जल स्थर बढ़ता चला गया। देखते ही देखते नदी का जलस्तर विकराल रूप लेने लगा और 60 जिंदगियां बीच नदी में फंस गई। लोगों में चीख पुखार मचने लगी। तभी उन सब पर सड़क पर जाते हुए लोगों की नजर पड़ी और उन्होंने इस बात की सूचना थाने में दी।
मौके पर पुलिस पहुंची और तब नदी में फंसी जिंदगियां को निकालने का काम शुरू किया गया। पुलिस ने एक घंटे तक रेस्क्यू कर कड़ी मशक्कत के बाद इन 60 लोगों की जान बचाई। लेकिन बड़ा सवाल ये की हर बार बिना पहले सूचना के श्रीनगर जलविद्युत परियोजना कब तक बाध का पानी छोड़ाता रहेगा और लोगों की जान को घतरे में डालता रहेगा। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है पहले की एक दर्जन से ज्यादा घटनाए श्रीनगर में घट चुकी हैं। जिसमे कई लोगों की जिंदगी बीच नदी में फसी रही। पुलिस और प्रशासन भी इस मामले में कंपनी पर कोई एक्शन नहीं लेने के लिए तैयार नहीं है। एक बार फि से सवाल उठता है कि क्या विकास के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ होना चाहिए। क्या रसूखदार लोगों पर पुलिस प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता ? अगर ऐसा सच में है तो उत्तराखंड विकास से अभी कोसों दूर है।