image: This village of Uttarakhand plays hostage to Hanumanji

बाप रे..बजरंगबली से दुश्मनी...उत्तराखंड का ये गांव हनुमानजी से दुश्मनी निभाता है !

Apr 13 2017 11:50AM, Writer:हैदर अली खान

बजरंग बली, नहावीर, शौर्यवान वीर हनुमान, ना जाने कितने ऐसे नाम हैं, जिनसे वीर हनुमान को पुकारा जाता है। राम भक्त भगवान हनुमान की कई गाथाएं हैं, कई कहानियां हैं। इनके आगे जमाना आस्था से सिर झुकाता है। जिनकी वीर गाथाएं दुनिया गाती है। जिनके आगे लंकेश्वर रावण ने घुटने टेक दिए थे। जिन्होंने एक पल में सोने की लंका को राख में तब्दील कर दिया था। क्या उनसे कोई दुश्मनी कर सकता है या दुश्मनी निभा सकता है। आप सोच रहे होंगे वो कौन है जो बजरंगबली से दुश्मनी निभाता है। लेकिन ये बात सौ फीसदी सच है। और ये सच्चाई सीधे देव भूमि उत्तराखंड के एक गांव से जुड़ी हुई है। उत्तराखंड में एक गांव है जो आज भी हनुमानजी से दुश्मनी निभाता है। और नाराजगी इतनी कि इस गांव के लोग आज भी बजरंगबली की पूजा नहीं करते। अब ऐसा आखिर क्यों है ? आखिर क्यों गांव के लोग वीर हनुमान की पूजा नहीं करते ? इसके पीछे भी एक अजब कहानी है। आप भी इस कहानी को पढ़कर हैरान हो सकते हैं।

बजरंगबली पूरी दुनिया के हिंदुओं की आस्था का प्रतीक हैं और उनकी पूजा की जाती है। लेकिन हनुमानजी से उत्तराखंड के चमोली जिले के द्रोणगिरी गांव के लोग दुश्मनी निभाते हैं। गांव के लोग उनसे नफरत करते हैं। और ये नफरत की परंपरा कई सालों से चली आ रही है। द्रोणगिरी पर्वत पर बसे होने की वजह से इस गांव का नाम 'द्रोणगिरी गांव' पड़ा। यहां के लोगों का कहना है कि संजीवनी बूटी के लिए हनुमानजी 'द्रोणगिरी पर्वत' का एक हिस्सा उठाकर ले गए थे। और यही वो कारण है जिसकी वजह से गांव के लोग हनुमानजी से आज भी नाराज हैं। गांववाले इस बात से आज भी बेहद नाराज हैं कि बजरंगबली उनकी संजीवनी बूटी चुरा ले गए थे। अब गांव वाले इस बारे में क्या कहते हैं , इस बारे में भई राज्य समीक्षा ने जानने की कोशिश की है। आइए अब आपको बताते हैं कि आखिर इस गांव के लोगों की महाबली हनुमान से नाराजगी क्यों है ?

गांववाले कहते हैं कि मेघनाद से युद्ध के दौरान मूर्छित हुए लक्ष्मण के लिए हनुमानजी जिस वक्त संजीवनी बूटी लेने आए थे, उस वक्त उनके पहाड़ देवता ध्यान मुद्रा में थे। इस दौरान बजरंगबली ने बूटी लेने के लिए देवता की अनुमति नहीं ली। यही नहीं हनुमानजी ने उनके देवता की सा‍धना भी भंग कर दी और उनकी दाईं भुजा भी उखाड़ डाली। गांव के लोगों का ये मानना है कि पहाड़ देवता की दाईं भुजा से आज भी रक्त बहता है। यही वजह है कि यहां के लोग बजरंगबली से नाराज हैं और उनकी पूजा नहीं करते। कुल मिलाकर कहें तो देवताओं की धरती उत्तराखंड कई रहस्यों और कई कहानियों से भरा पड़ा है। यहां इतनी कहानियां भरी पड़ी हैं कि सारी किताबें भी कम पड़ जाएंगी। आगे भी आपको हम इस तरह की खबरों के बारे में बताते रहेंगे। राज्य समीक्षआ का मकसद है कि आप अपने उत्तराखंड के बारे में हर बात जानें।


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