उत्तराखंड के कई रहस्यों को समेटे हुए है ये मंदिर…ये है अद्भुत वास्तुकला का प्रमाण !
Apr 13 2017 9:45PM, Writer:मीत
उखीमठ उत्तराखंड के रुद्र प्रयाग ज़िले में स्थित है। ये केदारनाथ के पास स्थित एक छोटा-सा कस्बा है, जिसकी समुद्रतल से ऊंचाई 4300 फ़ुट है। मान्यताओं के अनुसार उखीमठ का प्रारम्भिक नाम 'उषामठ' था, जो बाद में बदलकर 'उखीमठ' हो गया। यहां की स्थानीय किंवदन्ती के अनुसार उषा-अनिरुद्ध की प्रसिद्ध पौराणिक प्रणयकथा की घटना स्थली यही है। एक विशाल मंदिर में अनिरुद्ध और उषा की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित हैं। इनके साथ ही मांधाता की भी मूर्ति है। कहा जाता है कि केशव मंदिर में जो समुख शिवलिंग है, वो कत्यूरी शासन के समय का है। मंदिर का वर्तमान भवन अधिक प्राचीन नहीं है। कहा जाता है कि उखीमठ स्थान का मूल नाम 'उषा' या 'उषा मठ' था, जो बाद में उखीमठ हो गया। उषा बाणासुर की कन्या थी। उषा-अनिरुद्ध की सुंदर कथा का श्रीमद्भागवत में सविस्तार वर्णन है, जिसमें बाणासुर की राजधानी शोणितपुर में कही गई है।
शोणितपुर का अभिज्ञान गोहाटी से किया गया है। उखीमठ में पहले लकुलीश शैवों की प्रधानता थी। मंदिर की वास्तुकला पर दक्षिणी भारतीय स्थापत्य का प्रभाव है, जो इस ओर शंकराचार्य तथा उनके अनुवर्ती दक्षिणात्यों के साथ आया था। कहा जाता है कि भगवान शिव ने मान्धाता को ओमकार रूप में यहां दर्शन दिए। यहाँ मंदिर रोड पर उषा कुण्ड था। इसके अलावा मोराली नाम के स्थान पर बाणासुर के भाई दानासुर का मंदिर है। जनश्रुति है की इन्द्र आज भी इनका कहना मानते हैं, जिसकी मूर्ति बाहर निकलने पर बारिश आ जाती है। जनश्रुति है कि मंदिर में एक मसान बार है जिसे भूतो से छीना गया था। मंदिर के सामने जहा पर पानी का नल है उसके नीचे जल कुण्ड हुआ करते थे। कहा जाता है कि दयानंद सरस्वती ने कुछ समय उखीमठ में बिताया था। ये मंदिर नागर शैली में बना है जो की 32 कोनों से निर्मित है।
ये अपने आप में पुरातन कला का अद्भुत उदाहरण है। उखीमठ का नाम पहले उषामठ था जो बाद में उखामाथ और फिर उखीमठ हो गया। प्राचीन काल में उखीमठ के रावल को दंड देने का अधिकार था। जिसमे वो दोषी व्यक्ति को छोटे दंड में ताली पटपदया नाम की जगह मजदूरी के लिए भेज देते थे। उखीमठ में जग्देयी माता का मंदिर वागली नाम के स्थान पर है जो बंजपानी गाँव के बच्चों के जलक्रीडा का स्थान है। उखीमठ मंदिर में चून यानी 5 देवियों का भी निवास है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण से युद्ध करते समय बाणासुर के पुकारने पर भगवान शिव भोलेस्वर में अवतरित हुए थे। कुल मिलाकर कहें तो उत्तराखंड अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है। उन रहस्यों में एक रहस्य उखीमठ के मंदिर का भी है। हर साल इस पवित्र स्थल पर लाखों यात्री दर्शन के लिए आते हैं ।