image: The importance of Modi and yogi for bjp-0417

इस जोड़ी का जवाब नहीं, अब तो पूरे देश में आएगी भगवा सुनामी !

Apr 17 2017 8:52PM, Writer:Shan

देश की सियासत में बदलाव का सिलसिला लगातार जारी है। 2014 से पहले नरेंद्र मोदी को लेकर कहा जा रहा था कि गुजरात के बाहर उनको कोई नहीं जानता है। लेकिन नरेंद्र मोदी ने सारे विरोधियों को झटका देते हुए प्रधानमंत्री की कुर्सी तक का सफर तय किया। मोदी के नेतृत्व में बीजेपी लगातार आगे बढ़ रही है। फिलहाल देश के 13 राज्यों में बीजेपी की सरकार है। 2014 के बाद से देश की राजनीति दो ध्रुवों में बंट गई है। एक तरफ मोदी समर्थक हैं तो दूसरी तरफ मोदी विरोधी हैं। अब योगी के आने के बाद से ब्रांड हिंदुत्व तेजी से आगे बढ़ रहा है। ये जोड़ी विरोधियों के लिए एक कड़वी सच्चाई बन गई है। जिसे वो देखते तो हैं लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ को यूपी की कमान सौंप कर बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वो देश के बहुसंख्यकों की राजनीति करेगी।

बीजेपी अल्पसंख्यकों को लुभाने की बजाय देश की बहुसंख्यक आबादी को साधने की कोशिश करेगी। इस कोशिश की पहली प्रयोगशाला उत्तर प्रदेश का चुनाव बना। जहां पर मोदी और योगी की जोड़ी का जलवा देखने को मिला। बीजेपी को प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिला। 403 में से बीजेपी ने 325 सीटों पर कब्जा किया। प्रश्न ये भी खड़े हो रहे हैं कि क्या मोदी-योगी की जोड़ी फिलहाल देश में सबसे बड़ी और लोकप्रिय सियासी जोड़ी है। ऐसी चर्चाओं के पीछे कुछ ठोस कारण भी हैं। यूपी में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद जिस तरह से उनकी लोकप्रियता में तेजी आई है उस से ये कहा जा रहा है कि वो मोदी के बाद बीजेपी के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। यहां तक की दूसरे बीजेपी शासित राज्यों में भी योगी के चर्चे हैं। विरोधी भी इस बात को दबी जुबान में मान रहे हैं कि योगी ने अपनी छवि के विपरीत काम करके अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया है।

पहले ये कहा जा रहा था कि योगी के सीएम बनने से प्रदेस में मुसलमानों के लिए माहौल खराब होगा। लेकिन योगी ने अपने एक महीने के कार्यकाल में ही मुसलमानों का ये भय दूर कर दिया है. यही कारण ही भारी संख्या में मुस्लिम महिलाएं अपनी समस्या लेकर योगी के पास पहुंच रही हैं। केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी, ये नारा अब विरोधियों के लिए बुरे सपने की तरह होता जा रहा है। विरोधी दलों के कई नेता हैं जो मोदी के लिए अपनी नफरत खुलेआम जाहिर कर चुके हैं। ममता से लेकर लालू तक, सभी को इस बात से दिक्कत है कि मोदी प्रधानमंत्री कैसे बन गए हैं। तमाम विरोध के बाद भी एक बात को नकारा नहीं जा सकता है कि मोदी-योगी की जोड़ ने सियासत के मायने बदल के रख दिए हैं। दोनो ही विकासवादी राजनीति कर रहे हैं। विरोधियों के हमले से बेखबर जनता को साधने का काम कर रहा है।


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