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गरीब परिवारों के लिए मोदी का महाऐलान… करोड़ों परिवारों में बंटेंगे 1-1 लाख रुपये !

Apr 20 2017 1:56PM, Writer:मीत

देश के पीएम मोदी एक और फॉर्मूला लेकर आए हैं। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार एक माइक्रो-क्रेडिट प्रोग्राम तैयार कर रही है। इस प्रोग्राम की मदद से ग्रामीण इलाकों के परिवारों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की जाएगी। दरअसल ये प्रस्ताव ऐसा है कि अगले तीन से 5 सालों में हर परिवार को एक लाख रुपये तक कर्ज दिया जाएगा। इस कर्ज के बदले किसी चीज को भी गिरवी नहीं रखा जाएगा। इसके अलावा इस कर्ज पर लगने वाले ब्याज में सरकार की ही तरफ से सब्सिडी भी दी जाएगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव अमरजीत सिन्हा ने इस बात की जानकारी भी दी है। सिन्हा ने कहा है कि सरकार ने कर्ज लेने की प्रक्रिया और ज्यादा आसान कर दी है। उन्होंने कहा कि सरकार हर परिवार की आजीविका के साधनों के ब्योरे जुटाने में लगी है। इस ब्योरे के मुताबिक ही गरीब परिवारों को कर्ज दिया जाएगा।

बताया तो ये भी जा रहा है कि सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना में करीब 8.5 करोड़ गरीब परिवारों को लिस्ट में डाला गया है। चिन्हित किया गया है। बताया जा रहा है कि 2019 तक इन गरीब परिवारों को सरकार की इस योजना से जोड़ा जाएगा। दरअसल, सरकार चाहती है कि बैंक लिंकेज को हर हाल में डबल किया जाए। इस तरह से हर साल 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया जाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे 2019 तक ग्रामीण परिवारों के लिए आय के संसाधन का इंतजाम किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार का लक्ष्य है कि इन परिवारों की निर्भरता स्थानीय तौर पर कर्ज देने वाले लोगों और कंपनियों से हटाई जाएगी। यानी कुल मिलाकर इन लोगों को सरकार पर ही निर्भर करवाया जाएगा। देखा जाता है कि स्थानीय लोग और कंपनियां गरीबों को ज्यादा ब्याज पर कर्ज देते हैं। इसके अलावा ये भी देखा जाता है कि बैंक आम तौर पर 11 फीसदी तक का इंट्रेस्ट लेते हैं।

बताया जा रहा है कि इस नए प्रस्ताव में ब्याज का बोझ काफी कम किया जाएगा। खबर है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कृषि एवं पशुपालन मंत्रालय के साथ एक मेमोरंडम पर साइन किए हैं। इसका मकसद ये है कि गरीब परिवारों को पोल्ट्री फॉर्म लगाने और पशुपालन के लिए कर्ज दिया जाएगा। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय इस रकम पर 7 फीसदी तक का ही ब्याज लगाएगा। इसके अलावा इस योजना के तहत अगर देश के करीब 250 पिछड़े जिलों के परिवार कर्ज वक्त पर चुकाते हैं, तो उन्हें ब्याज में 3 फीसदी की अतिरिक्त छूट मिलेगी। ऐसे मामले में प्रभावी ब्याज दर सिर्फ 4 फीसदी ही रह जाएगी। सिन्हा का कहना है कि सरकार लोन मुहैया कराकर आय के कई मौके बनाना चाहती है। इसके साथ ही उनका कहना है कि इससे परिवारों को अपने संसाधनों का और अपने कौशल का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।


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