उत्तराखंड के इस मंदिर पर अमेरिका में रिसर्च...बड़े-बड़े वैज्ञानिक इस ‘शक्ति’ से हैरान !
Apr 23 2017 9:21AM, Writer:मीत
उत्तराखड हमेशा से ही देवताओं की निवास स्थली कहा गया है। आप शायद ही ये जानते होंगे कि उत्तराखंड में एक ऐसा स्थान भी है, जहां मां दुर्गा साक्षात् प्रकट हुई थीं. देवभूमि का ये स्थान भारत का एकमात्र और दुनिया का तीसरा ऐसा स्थान है, जहां खास चुम्बकीय शक्तियां मौजूद हैं. खुद नासा के वैज्ञानिक भी इस पर शोध कर चुके हैं। जी हां उत्तराखंड के अल्मोड़ा में कसार पर्वत पर मौजूद मां दुर्गा के मंदिर में अनोखी शक्तियां मौजूद हैं। यहां आने वाले भक्त आसानी से सैकड़ों सीढ़ियां बिना किसी थकावट के ही चढ़ जाते हैं. मान्यता है कि ढाई हजार साल पहले मां दुर्गा ने दो राक्षसों का वध करने के लिये कात्यायनी रूप में अवतार लिया था. तब से इस जगह को विशेष स्थान के रूप में जाना जाता है। उत्तराखंड में मौजूद देवी मां के इस मंदिर ने विज्ञान जगत को भी हिलाकर रख दिया है।
दुनियाभर के वैज्ञानिक इस मंदिर पर रिसर्च करने में जुट गए हैं।उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित कसारदेवी मंदिर की 'असीम' शक्ति से नासा के वैज्ञानिक भी हैरान हैं। नासा के वैज्ञानिक चुम्बकीय रूप से इस जगह के चार्ज होने के कारणों और प्रभावों पर शोध कर रहे हैं।पर्यावरणविद डॉक्टर अजय रावत ने भी लंबे समय तक इस पर शोध किया है। उन्होंने बताया कि कसारदेवी मंदिर के आसपास वाला पूरा क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है, जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है। इस पिंड में विद्युतीय चार्ज कणों की परत होती है जिसे रेडिएशन भी कह सकते हैं।पिछले कई साल से नासा के वैज्ञानिक इस बैल्ट के बनने के कारणों को जानने में जुटे हैं। इस वैज्ञानिक अध्ययन में यह भी पता लगाया जा रहा है कि मानव मस्तिष्क या प्रकृति पर इस चुंबकीय पिंड का क्या असर पड़ता है।
अब तक हुए इस अध्ययन में पाया गया है कि अल्मोड़ा स्थित कसारदेवी मंदिर और दक्षिण अमेरिका के पेरू स्थित माचू-पिच्चू व इंग्लैंड के स्टोन हेंग में अद्भुत समानताएं हैं।इन तीनों जगहों पर चुंबकीय शक्ति का विशेष पुंज है। डॉ. रावत ने भी अपने शोध में इन तीनों स्थलों को चुंबकीय रूप से चार्ज पाया है। उन्होंने बताया कि कसारदेवी मंदिर के आसपास भी इस तरह की शक्ति निहित है।स्वामी विवेकानंद ने 1890 में ध्यान के लिए कुछ महीनों के लिए आए थे। बताया जाता है कि अल्मोड़ा से करीब 22 किमी दूर काकड़ीघाट में उन्हें विशेष ज्ञान की अनुभूति हुई थी। इसी तरह बौद्ध गुरु लामा अंगरिका गोविंदा ने गुफा में रहकर विशेष साधना की थी। हर साल इंग्लैंड से और अन्य देशों से अब भी शांति प्राप्ति के लिए सैलानी यहां आकर कुछ माह तक ठहरते हैं।