सावधान उत्तराखंड...देवभूमि में घुसे माओवादी...जगह-जगह लगाए ऐसे पोस्टर !
Apr 24 2017 9:06PM, Writer:मीत
सावधान उत्तराखंड जी हां हम सारे उत्तराखंड वासियों से ये बात कहना चाहते हैं। हो सकता है कि आप माओवादियों के निशाने पर हों। जी हां हाल ही में अल्मोड़ा में जो हुआ है, वो सच में हैरान कर देने वाला है । माओवादियों के नाम से उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पोस्टर चिपकाए गए हैं। अब ये किसने किया है, ये तो बाद का विषय है, लेकिन उससे पहले सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर उत्तराखंड में ये हो क्या रहा है ? कुमाऊं मंडल में माओवादियों फिर से पोस्टर चस्पा कर लोगों को हिंसा के लिए उकसाने की नापाक कोशिशें की हैं। इसके लिए उन्होंने आड़ ली है इन दिनों चल रहे शराब विरोधी आंदोलन की। अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट ब्लाक में इस तरह के पोस्टर सामने आने के बाद जिला एवं पुलिस प्रशासन हकरत में आ गया। अल्मोड़ा के एसएसपी डीएस कुंवर ने कहा कि कानून व्यवस्था किसी भी दशा में बिगड़ने नहीं दी जाएगी। इसके अलावा भी इस खबर को लेकर कुछ और भी बातें कही जा रही हैं, जो आपको हैरान कर देंगी।
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तरी बिहार में 'रेड कॉरिडोर' की साजिश के सूत्रधार माओवादी थिंक टैंक प्रशांत सांगलेकर उर्फ प्रशांत राही और पहली पांत के कमांडर हेम मिश्रा को उम्र कैद होने के बाद ठंडे पड़े माओवादी फिर छटपटाने लगे हैं। प्रदेश में शराबबंदी की आड़ लेकर आंदोलनकारियों के बीच पैठ बनाने की जुगत भिड़ाई जा रही है। इसी क्रम में अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट ब्लॉक में माओवादियों के भड़काऊ अपील लिखे पोस्टर चस्पा किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार यहां बिंता, कामा, बगवलीपोखर आदि क्षेत्रों में इस तरह के पोस्टर दिखे हैं। इनमें राष्ट्रविरोध तो नहीं है, मगर शराब की दुकानों में आगजनी व हिंसा की अपील की गई है। कामा गांव की प्रधान पार्वती देवी व सामाजिक कार्यकर्ता कुंदन नेगी ने बताया कि क्षेत्र में सार्वजनिक और सरकारी भवनों की दीवारों पर भी माओवादियों ने पोस्टर चस्पा कर रखे हैं। एक बार फिर से सवाल उठने लगा है कि क्या माओवादियों का अगला निशाना देवभूमि उत्तराखंड ही है ?
अल्मोड़ा के एसएसपी डीएस कुंवर का कहना है कि माओवादियों ने साजिशन शराब विरोधी आंदोलन के बहाने खुद को मजबूत करने की कोशिश की है। पोस्टरों व दीवारों पर लिखे गए नारों में देशद्रोह की बातें नहीं हैं, लेकिन शराब के खिलाफ लोगों को भड़काने की अपील को गंभीरता से लिया जा रहा है। उत्तराखंड शासन के सचिव गृह विनोद शर्मा का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। खुफिया एजेंसियों को इसकी जांच के लिए लगाया गया है ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके। ये भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी ने शरारत के लिए से तो यह कदम नहीं उठाया। माना तो ये ही जा रहा है कि ये किसी माओवादी की ही करतूत है। इस बीच आपको बता दें कि माओवादी इससे पहेल भी उत्तराखंड को अपना निशाना बना चुके हैं। इसलिए हम बार बार आपसे कह रहे हैं कि एक बार फिर से सावधान रहें। हो सकता है कि माओवादियों को अगला निशाना अब देवभूमि ही हो।