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देवभूमि के रक्षक जागेश्वर महादेव…जानिए... इस जगह पर वैज्ञानिकों को क्या मिला ?

Apr 25 2017 9:35PM, Writer:मीत

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से 35 किलोमीटर दूर स्थित है जागेश्वर धाम। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर ये क्षेत्र सदियों से आध्यात्मिक जीवंतता प्रदान कर रहा है। यहां लगभग 250 मंदिर हैं जिनमें से एक ही स्थान पर छोटे-बडे 224 मंदिर स्थित हैं।उत्तर भारत में गुप्त साम्राज्य के दौरान हिमालय की पहाडियों के कुमाऊं क्षेत्र में कत्यूरीराजा थे। जागेश्वर मंदिरों का निर्माण भी उसी काल में हुआ। इसी कारण मंदिरों में गुप्त साम्राज्य की झलक भी दिखलाई पडती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अनुसार इन मंदिरों के निर्माण की अवधि को तीन कालों में बांटा गया है। कत्यूरीकाल, उत्तर कत्यूरीकाल एवं चंद्र काल। बर्फानी आंचल पर बसे हुए कुमाऊं के इन साहसी राजाओं ने अपनी अनूठी कृतियों से देवदार के घने जंगल के मध्य बसे जागेश्वर में ही नहीं वरन् पूरे अल्मोडा जिले में चार सौ से अधिक मंदिरों का निर्माण किया जिसमें से जागेश्वर में ही लगभग 240 छोटे-बडे मंदिर हैं। मंदिरों का निर्माण लकडी और सीमेंट की जगह पत्थर की बडी-बडी शिलाओं से किया गया है।

दरवाजों की चौखटें देवी देवताओं की प्रतिमाओं से अलंकृत हैं। मंदिरों के निर्माण में तांबे की चादरों और देवदार की लकडी का भी प्रयोग किया गया। जागेश्वर को पुराणों में हाटकेश्वर और भू-राजस्व लेखा में पट्टी पारूण के नाम से जाना जाता है। पतित पावन जटागंगा के तट पर समुद्रतल से लगभग पांच हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र जागेश्वर की नैसर्गिक सुंदरता अतुलनीय है। कुदरत ने इस स्थल पर अपने अनमोल खजाने से खूबसूरती जी भर कर लुटाई है। लोक विश्वास और लिंग पुराण के अनुसार जागेश्वर संसार के पालनहार भगवान विष्णु द्वारा स्थापित बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है। पुराणों के अनुसार शिवजी तथा सप्तऋषियों ने यहां तपस्या की थी। कहा जाता है कि प्राचीन समय में जागेश्वर मंदिर में मांगी गई मन्नतें उसी रूप में स्वीकार हो जाती थीं जिसका भारी दुरुपयोग हो रहा था। इसके बाद शंकराचार्य ने इस धरा पर आकर बहुत बड़ा काम किया था।

आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य जागेश्वर आए और उन्होंने महामृत्युंजय में स्थापित शिवलिंग को अलंकृत कर के इस दुरुपयोग को रोकने की व्यवस्था की। शंकराचार्य जी द्वारा कीलित किए जाने के बाद से अब यहां दूसरों के लिए बुरी कामना करने वालों की मनोकामनाएं पूरी नहीं होती।केवल यज्ञ एवं अनुष्ठान से मंगलकारी मनोकामनाएं ही पूरी हो सकती हैं। महादेव की इस नगरी में आकर आपको अनूठी शांति मिलेगी। कहते हैं कि यहां अगर आप एक बार ध्यान लगाकर बैठ गए तो कई घंटों तक इसी अवस्था में रहते हैं। इसकी वजह है इस मंजिर के चारों तरफ भ्रमण करने वाली शक्ति । वैज्ञानिक भी इस जगह को लेकर कई बार रिसर्च कर चुके हैं। हर बार वैज्ञानिकों ने यही पाया कि इस स्थान पर कोई शक्ति पुंज लगातार विचरण करता रहता है। वैज्ञानिक भी इस स्थान को धरती के सबसे पवित्र स्थानों में से एक मानते हैं। तो कुल मिलाकर कहें तो आप भी एक बार जरूर इस पवित्र धरा पर आईए और महादेव का आशीर्वाद लीजिए।


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