देवभूमि के इस शिक्षक ने पेश की देश के सामने मिसाल...विदाई पर रोईं हजारों आखें...
May 3 2017 9:50PM, Writer:मीत
कहते हैं कि शिक्षक ही आपको सब कुछ बनाता है। वो आपके सपनों को सही रूप देता है। आपको जिंदगी में आगे बढ़ने के ख्वाब देखने का मौका देता है। आपके हर सपने को पूरा करने के लिए अपनी जी जान लगा देता है। आपके कदम से कदम मिलाकर चलता है। ऐसे शिक्षकों के लिए दुनिया से बढ़कर अपने छात्र होते हैं। ऐक ऐसा ही शिक्षक है देवभूमि उत्तराखंड में, जिसकी विदाई क्या हुई कि पूरे गांव के लोगों की आंखों से आंसू निकल गए। अगर कहें तो शिक्षा के आधुनिकीकरण के दौर में इस शिक्षक में अनोखी मिसाल कायम की, तो गलत नहीं होगा। यह खबर ही कुछ ऐसी है जो सरकारी स्कूलों के टीचर्स की छवि को तोड़ती है। चमोली जिले के देवाल ब्लाक के जूनियर हाईस्कूल सुय्या की कहानी हम आपको बता रहे हैं। इस स्कूल में तैनात शिक्षक विनोद चंद्र का तबादला क्या हुआ कि, उनकी विदाई में पूरा गांव उमड़ पड़ा। इसके अलावा भी अस खबर से जुड़ी कुछ और भी बाते हैं।
ढोल-दमाऊं की गूंज के बीच पारंपरिक परिधानों में सजे ग्रामीण गांव की सीमा तक उन्हें छोड़ने आए और नम आंखों के साथ विदा किया। चमोली के इस गांव की आबादी करीब आठ सौ से ज्यादा है। सुय्या गांव तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर की दूरी पैदल नापनी होती है। यहां जूनियर हाईस्कूल में छात्र-छात्रों की संख्या 32 ही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि शिक्षक विनोद चंद्र ने ऐसा क्या खास कर दिया कि पूरा गांव उनकी विदाई पर रो पड़ा ? ग्राम प्रधान हीरा राम का कहना है कि जब गुरुजी साल 2006 में इस गांव में आए थे, तब ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को लेकर निजी स्कूलों का का रूख करने लगे थे। लेकिन गुरुजी ने ना केवल अभिभावकों को अपने बच्चे सरकारी स्कूल में भेजने के लिए प्रेरित किया, बल्कि अपने खर्चे से स्मार्ट क्लास का संचालन किया और शिक्षा को और भी ज्यादा रोचक बना दिया। गुरुजी ने विज्ञान कक्ष का भी निर्माण कराया।
ग्राम प्रधान हीरा राम बताते हैं कि विनोद चंद्र पुस्तकालय की स्थापना कर गुरुजी ने ग्रामीणों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सहायक अध्यापक विनोद चंद्र विज्ञान पढ़ाते हैं। विनोद बताते हैं कि साल 1996 में पहली तैनाती से अब तक उन्होंने हमेशा दुर्गम स्थानों में ही सेवाएं दी हैं। वो कहते हैं कि पहाड़ों से पलायन का एक बड़ा कारण अच्छी शिक्षा का अभाव भी है। अगर अध्यापक शिक्षण कार्य में रुचि लें तो इस पर कुछ हद तक लगाम लगाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि उनका तबादला जूनियर हाईस्कूल गाड़ी में हुआ है। ग्रामीणों ने विदाई समारोह का आयोजन किया तो उसे भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कुल मिलाकर कहें तो देवभूमि में अभी भी ऐसे शिक्षक हैं, जो कुशल होने के साथ साथ टेक्नोलॉजी के युग के साथ चल रहे हैं। ऐसे गुरू, जो अपने खर्चे से ही गांव में लाइब्रेरी बना रहे हैं और लोगों को शिक्षा की तरफ लगातार अग्रसर कर रहे हैं। राज्य समीक्षा का ऐसे गुरु को सलाम है।