image: Archeologist fInd mandarachal Mountain

‘समुद्र मंथन’ का जीता-जागता सबूत… वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला मन्दरांचल पर्वत

May 12 2017 5:48PM, Writer:मीत

हमें इस बात के सबूत मिलते रहते हैं कि हमारी पौराणिक कहानियों में जो पात्र होते थे, वो महज एक कोरी कल्पना नहीं थे। कई बार साबित हो चुका है कि ये पात्र हकीकत थे। इस कड़ी में एक और बड़ा सबूत मिला है। आपने समुद्र मंथन की कहानी तो पढ़ी होगी। देवताओं और दानवो ने वासुकि नाग को मन्दरांचल पर्वत के चारों तरफ लपेटा था। इसके बाद समुद्र मंथन किया गया था। अब कहा जा रहा है कि दक्षिण गुजरात के समुद्र में ये पर्वत मिल गया है। इसके साथ ही हैरानी की बात तो ये है कि वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर ही इस बात की पुष्टि की गई है। कहा गया है कि इस पर्वत में ग्रेनाइट काफी मात्रा में है। इसके अलावा इस पर्वत के बीचों-बीच एक नाग की आकृति भी है। आमतौर पर समुद्र में पाए जाने वाले पर्वत इस तरह के नहीं होते हैं। सूरत के आॉर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी ने इस पर कॉर्बन टेस्ट के परीक्षण किया।

इसके बाद ही कहा है कि ये समुद्र मंथन वाला पर्वत है। कहा जा रहा है कि अब भारत में समुद्र मंथन के बड़े प्रमाण मिलने लगे हैं। इसके अलावा ओशनोलॉजी नाम की वेबसाइट में इस तथ्य की आधिकारिक रूप से पुष्टि भी की गई है। बताया जा रहा है कि सूरत के ओलपाड से लगे पिंजरत गांव के पास समुद्र में ही प्राचीन द्वारकानगरी के भी अवशेष मिले थे। समुद्र मंथन वाले पर्वत की जानकारी हासिल करने के लिए मितुल त्रिवेदी ने काफी मेहनत भी की। बताया जा रहा है कि वो एक और भूगर्भशास्त्री के साथ समुद्र के अंदर 800 मीटर की गहराई तक गए । इसके बाद उन्हें समुद्र के गर्भ में एक पर्वत मिला । इस पर्वत पर घिसाव के निशान नजर आए। इसके बाद ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट ने पर्वत के बारे में स्टडी शुरू कर दी। पहले तो ये कहा गया कि घिसाव के ये निशान जलतरंगों के हो सकते हैं।

लेकिन इसके बाद इस पर्वत का विशेष कार्बन टेस्ट किया गया। इसके बाद कहा गया कि ये ही मन्दरांचल पर्वत है। समुद्रमंथन के लिए ही इस पर्वत का इस्तेमाल किया गया था। ये जानकारी दो साल पहले आई थी और अब इसके सबूत मिलते जा रहे हैं। ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर 50 मिनट का एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि पिंजरत गांव के समुद्र से दक्षिण में 125 किलोमीटर दूर 800 मीटर की गहराई में समुद्रमंथन वाला पर्वत है। इसके बाद ऑर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट ने इस पर्वत के अलग अलग टेस्ट किए। इससे साफ हुआ कि इस पर्वत पर जो निशान पड़े हैं, वो जलतरंगों के नहीं हैं। कहा जाता है कि द्वारका नगरी के पास ही समुद्र मंथन किया गया था। इस परीक्षण के दौरान द्वारका नगरी के भी सबूत मिले हैं। कुल मिलाकर कहें तो ये बात सच साबित हो रही है कि हमारी पौराणिक कहानियों में कोई पात्र झूठा नहीं था।


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