इस पहाड़ी ने अपने दम से झुका दी दुनिया…गांव के लिए बना ‘देवदूत’...रोका पलायन !
May 23 2017 9:35PM, Writer:अंकित
कहते है कि जिनके हौसले बुलंद होते है उनकी कभी हार नहीं होती। ऐसा ही कुछ पौड़ी के जुलेड़ी गांव के 35 साल के युवक अनिल ग्वाड़ी ने कर के दिखाया है। अनिल के गांव में पानी के संकट से गांव के 45 परिवार बेहद परेशान थे। गांव से हो रहे पलायन का सबसे बड़ा कारण भी पानी का संकट ही था। आखिरकार अनिल में मन में ठान ही ली। अनिल ने गांव में पानी पहुंचाने का संकल्प लिया। अनिल सामाजिक संस्था दगड़्या के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने संस्था के सदस्यों सहित गांव वालों से अपनी मंशा जाहिर की। प्रशासन से गांव वालों को कोई उम्मीद नहीं थी। इसके अलावा गांव का जल स्रोत नाव गधेरा करीब 600 मीटर नीचे है, जो आपदा में दब गया था। इस गधेरे को दोबारा ठीक करने का प्रयत्न किया गया। लोगों में अनिल ने जोश भरा और कहा कि हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती। अगर आपको अनिल की ये कहानी पसंद आए तो अपने दोस्तों के बीच इस पहाड़ी की ये कहानी जरूर शेयर कीजिएगा। देश देखेगा कि पहाड़ी बंदों में कितना दम है।
अनिल ने कहा कि पानी को चढ़ाई पर चढ़ाया जा सकता है। इस काम में गांव के युवा और बुजुर्ग भी अनिल के साथ खड़े हो गए। करीब दस दिन में गांव के लोगों ने स्रोत को पुनर्जीवित कर दिया । इसके साथ ही गांव वालों ने इसके पुख्ता इंतजाम भी कर डाले। स्त्रोत के चारों तरफ हौज बनाकर उसके पानी को प्लास्टिक के पांच टैंकों में जमा कर दिया गया। इस काम में पूरी टेक्नोलोजी का इस्तेमाल किया गया । टैंक तक पानी चढ़ाने के लिए बिजली की मोटर लगाई गई। इसके बाद टैंकों में पानी भरा गया। अब सवाल था कि ये पानी गांव त क कैसे पहुंचेगा। तो इसके लिए भी अनिल ने जबरदस्त प्लानिंग की। उन्होंने पाइप लाइन गांव तक लाकर चार स्टैंड पोस्ट बनाए। पहले पानी को पहाड़ पर चढ़ाने का ट्रायल किया गया। देखा गया कि गांव में पानी तो आ रहा था, लेकिन पानी की गति काफी धीमी थी।
इसके बाद एक और प्लानिंग की गई। इसके लिए पहले एक मोटर लगाई गई थी। लेकिन बाद में दो मोटर फिट कर दी गई। बस फिर क्या था जो सपना अनिल और बाकी गांव वालों ने देखा था, आखिरकार वो पूरा हुआ। गांव के लोगों को पानी मिलने लगा।अब सुबह-शाम दो-दो घंटे चार स्टैंड पोस्ट से गांव वालों को पानी मिल रहा है। कहा जा रहा है कि जल्द ही हर घर के सामने स्टैंड पोस्ट लगाई जाएगी। यहां तक कि इस काम में भी गांव वाले डट गए हैं।इस पूरे काम में अनिल के तीन लाख रुपये खर्च हो गए। इसके साथ ही अनिल को गांव वालों ने भी पूरा सहयोग दिया। इस तरह से अनिल ने साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हो तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। वैसे भी पहाड़ी बंदों की बात ही अलग होती है। अगर आपको ये स्टोरी पसंद आई तो अपने दोस्तों के बीच शेयर जरूर करें। अनिल जैसे कई लोगों को इससे प्रेरणा मिलेगी।