Video: उत्तराखंड के संगीत का ‘शाश्वत’ सत्य...जब देवप्रयाग से दुनिया जीतने चला पहाड़ी..
May 25 2017 9:54AM, Writer:मीत
राज्य समीक्षा की टीम आज आपको उत्तराखंड के एक सितारे के बारे में बताने जा रही है। वो सितारा जमीन पर है, लेकिन एक दिन कामयाबी के फ़लक पर होगा, हर किसी के दिल से ये ही दुआ निकलती है। वो पंडित परिवार में जन्मा उत्तराखंड के संगीत का शाश्वत सत्य है। नाम है शाश्वत पंडित। उत्तराखंड की सरजमीं में बहुत कम बार ऐसा होता, जब इस तरह के गायक जनता के सामने पेश होते हैं। अगर शाश्वत को कहें कि उत्तराखंड का संगीत उनकी रगों में लहू बनकर दौड़ रहा है, तो गलत नहीं होगा। शाश्वत का जन्म देवप्रयाग में हुआ था। पिता जयप्रकाश पंडित नगर पालिका अध्यक्ष भी रहे और अंग्रेजी के भी शिक्षक थे। घर में हर कोई संगीत प्रेमी था। शाश्वत छोटे से थे तो चाचा विनोद पंडित 500 रुपये में हार्मोनियम और तबला खरीद लाए, इसमें छोटा सा शाश्वत परदेसी, परदेसी वाली धुन बजाने लगा। अगर आप सोच रहे हैं कि यहां से शाश्वत के संगीत जीवन की शुरुआत हुई तो आप गलत हैं।
शाश्वत संगीत प्रेमी थे, लेकिन संगीत को करियर बनाने के बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा। पढ़ाई चलती रही और छोटा सा शाश्वत अब उत्तराखंड के बड़े खिलाड़ियों में गिना जाने लगा था। गढ़वाल विश्वविद्यालय से नॉर्थ जोन बैडमिटंन टूर्नामेंट के लिए सलेक्ट होने वाले शाश्वत श्रीनगर से अकेले खिलाड़ी बने। पहाड़ी स्वाभिमानी तो होते ही हैं, और ये ही गुण शाश्वत में भरा था। एक बार कॉलेज में सिंगिंग का इंटर फैकल्टी कॉम्पिटीशन चल रहा था। शाश्वत ने सोचा कि इस कॉम्पिटीशन में हिस्सा लिया जाए। लेकिन एक जज ने शाश्वत के पहाड़ी स्वाभिमान को ठेस पहंचा दी। जज ने कहा कि आप गाना नहीं गा सकते। बस वो पल था और शाश्वत का दिमाग संगीत के लिए कौंधने लगा, मन में ठान लिया कि अभी नहीं तो फिर कभी नहीं। यहां से शुरु हुआ शाश्वत की जिंदगी का असल सफर। चलते हुए गाना, खाते हुए गाना, सोचते हुए गाना, आंखे खोलो तो गाना आंखें बंद करो तो गाना। शाश्वत बदल रहे थे।
किराए के कमरे में मौसी के बेटे के साथ रहते थे। मौसी के बेटे ने एक दिन नींद से जगाया और कहा ‘भाई तू तो सपने में भी गा रहा है, और वो भी इतना शानदार कि पूछो मत’। शाश्वत जानते थे कि कुछ अलग करना है पर रास्ता किधर है?लेकिन शायद ऊपर वाले ने उनकी हर मु्श्किल को अपनी मर्जी माना। एमएससी बायोटेक्नोलॉजी से की थी, ऊपर से स्पोर्ट्स कोटा था ही, तो शाश्वत को ओएनजीसी से नौकरी का ऑफर आया। ओएनजीसी में कौन नौकरी नहीं करना चाहेगा, ये बात शाश्वत ने भी अपने मन में सोची चल पड़े अप्लाई करने। सब कुछ फाइनल हो गया। शाश्वत का दिल कुलांचे मारने लगा, लेकिन हाईस्कूल में 2 नंबर कम आए थे। इन दो नंबरों की वजह से शाश्वत को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। लेकिन इन्हीं दो नंबरों ने शाश्वत की जिंदगी बदल दी। आखिर क्यों और कैसे? ऐसा क्या हो गया था? इस बारे में आपको इस कहानी के दूसरे पार्ट में बताएंगे। कल सुबह 11 बजे का इंतजार कीजिए...फिलहाल ये वीडियो देखिए…(To be continue...)