image: Amit sagar beautiful song related to pahadi culture

Video: अतुल्य देवभूमि, अलौकिक संस्कृति...चैत से फागुण तक के त्योहार बताता है ये वीडियो

May 25 2017 6:51PM, Writer:मीत

उत्तराखंड में 12 महीने त्यौहार के होते हैं। ये वीडियो आपको इस बारे में सब कुछ बता रहा है। इस गाने को पहाड़ के जाने माने गायक अमित सागर ने गाया है। पहाड़ की संस्कृति को दर्शाता ये वीडियो बेहद ही खूबसूरत तरीके से तैयार किया गया है। अमित सागर ने आज पहाड़ के सिंगर्स में अपना नाम बिल्कुल अलग खड़ा कर दिया है। ये वीडियो आपको ये बताता है कि आखिर पहाड़ में हर महीने किस तरह से त्योहार मनाए जाते हैं। अब आपको बताते हैं कि आखिर उत्तराखंड में इन महीनों को किन नामों से पुकारा जाता है। अप्रैल से शुरू होता है चैत इसके बाद बैशाख, जेठ, आषाण, सौण, भादो, असूज, कातिक, मंगसीर, पूस, माघ और फागुण। इस वीडियो के जरिए बताया गया है कि किस तरह से चैत से लेकर फागुण तक उत्तराखंड में त्यौहारों का माहौल रहता है। अगर आप भी पहाड़ की संस्कृति से प्यार करते हैं तो हमें उम्मीद है आप ये जानकारी हर किसी तक पहुंचाएंगे।

सबसे पहले आपको ये बता दें कि इन 12 महीनों को पहाड़ में 6 ऋतुओं में बांटा गया है। चैत के महीने में पहाड़ में फूल खिलते हैं, इस दौरान फूलदेई जैसा बड़ा त्योहार मनाया जाता है। इसके बाद आता है बैशाख का महीना, बैशाख के महीने में पहाड़ में बिख्वोत मनाई जाती है। इसके बाद आता है जेठ का महीना, इस दौरान पहाड़ में काफल पकते हैं, जिसे लोग स्वाद लेकर खाते हैं। इसके बाद आषाण के महीने में पहाड़ों में धान यानी साठी की रोपाई होती है। इसके बाद आता है सौण का महीना, इस दौरान पहाड़ में आड़ू पकते हैं। आड़ू के पेड़ों में लगे फल पहाड़ की खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ाते हैं। इसके बाद वाले महीने यानी भादो के महीने में पहाड़ों में मुंगरी यानी मकई पकती है। लोग अपने नाते रिश्तेदारों को कलेऊ के तौर पर इसे देते हैं। इसके बाद असूज के महीने में धान पकता है और इसकी कटाई होती है। ये भी किसी बड़े त्यौहार से कम नहीं होता है।

और फिर आता है कातिक का महीना, इस दौरान पहाड़ में बग्वाल मनाई जाती है। बग्वाल यानी दीवाली, जो पहाड़ों में अलग ही अंदाज में मनाई जाती है। इसके बाद आता है मंगसीर का महीना, इस दौरान पहाड़ों में गेहूं की बुआई होती है, इसे भी बड़े त्योहार की तरह मनाया जाता है। फिर आता है पूस का महीना, जिस दौरान पहाड़ की चोटियां बर्फ से लकदक हो जाती हैं। इसके बाद माघ के महीने में आती है मकरैणी। मकरैणी का त्योहार भी पहाड़ में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसके बाद आता है फागुण का महीना, इस दौरान पहाड़ रंगों के त्यौहार होली में सराबोर हो जाता है। इस गाने को जिस तरीके से फिल्माया गया है, वो शानदार है। अमित सागर की आवाज में आपको ये गाना काफी पसंद आएगा। आज पहाड़ के गायकों ने अपनी संस्कृति को देश दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश की है, उम्मीद है कि आप भी पहाड़ों के रंगों से रंगे इस गाने को देखकर अपने दोस्तों के बीच शेयर जरूर करेंगे। जय उत्तराखंड


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