देवभूमि की सबसे शर्मनाक वारदात...पहले दुराचार, फिर शादी और फिर...
May 31 2017 7:40PM, Writer:हैदर
सेशन कोर्ट पौड़ी की अदालत ने नाबालिग से दुराचार के दोषी को 20 साल की कैद की सजा सुना दी है। इसके अलावा 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा भी सुनाई है। लेकिन वो बेटी अब भी सवाल पूछ रही है कि क्या इतना ही काफी है ? इससे पहले दोषी ने पीड़ित के साथ जो किया उस पर यकीन करना ही मुश्किल हो रहा है। इसी केस में साजिश रचने के आरोप में तीन आरोपियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है। एक और आरोपी नाबालिग है और उस पर किशोर न्यायालय के अधीन केस चल रहा है। इस मामले का खुलासा तब हुआ था जब पीड़ित के चाचा ने 9 अगस्त 2015 को पट्टी पटवारी के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी। जिला शासकीय एडवोकेट ने बताया है कि कोटद्वार तहसील क्षेत्र के एक गांव में कक्षा 11वीं में पढ़ने वाली छात्रा के साथ ये अमानवीय व्यवहार हुआ था। इससे आगे की कहानी पढ़कर आपका कलेजा फट पड़ेगा।
छात्रा की इज्जत से क्लास में पढ़ रहे एक नाबालिग और गांव के ही रहने वाले एक युवक ने खिलवाड़ किया था। इसके बाद हद तो तब हो गई थी, जब आरोपियों ने पीड़ित को धमकाना शुरू कर दिया। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पता चला कि बच्ची गर्भवती हो गई है। सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। 26 जुलाई 2015 को पीड़ित को कोटद्वार स्थित एक अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया। लेकिन बच्ची की तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बाद उसे नजीबाबाद के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। बताया गया है कि इसी अस्पताल में पीड़ित की डिलीवरी हुई थी। जब पीड़ित को भर्ती करवाया गया तो आरोपियों में से एक ने खुद को उसका पति बताया। इसके बाद ही डाक्टरों ने पीड़ित को भर्ती कर उसका इलाज किया। इसके बाद अस्पताल से पीड़ित लड़की को बुआ के पास हरिद्वार छोड़ा गया। जब पीड़ित बच्ची के चाचा को इस बात का पता चला तो उन्होंने नौ अगस्त 2015 को केस दर्ज करवाया।
तब राजस्व पुलिस ने इज्जत से खिलवाड़ और पोस्को एक्ट समेत अलग अलग धाराओं में केस दर्ज किया। बाद में ये मामला रेगुलर पुलिस के पास आ गया। इसके बाद पुलिस ने बच्ची का मेडिकल करवाया। पीड़िता के बयान लिए गए। तब जाकर पीड़िता ने बताया कि उसके साथ पढ़ने वाले छात्र ने गांव के ही युवकों के साथ मिलकर उससे दुराचार किया। मामला कोर्ट तक जा पहुंचा। सेशन कोर्ट पौड़ी ने नाबालिग से दुराचार के दोषी जय प्रकाश को 20 साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने इस मामले में नाबालिग आरोपी के पिता, मां और एक और महिला को साजिश रचने के आरोप में तीन-तीन साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता को एक लाख का विशेष मुआवजा दिया जाए। सवाल ये है कि क्या इस बच्ची की जिंदगी की कीमत 1 लाख रुपये है ? सवाल ये भी है कि क्या उत्तराखंड में बेटियां अब सुरक्षित नहीं हैं ?