जनरल बिपिन रावत का अपमान…इस लेखक ने की जनरल डायर से तुलना...गुस्से में देश...
Jun 7 2017 8:28PM, Writer:मीत
देश के आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत का एक लेखक ने अपमान किया है। इसके बाद से देश गुस्से में है। सीमा पर अपने प्राणों की परवाह किए बिना आतंकियों से दो दो हाथ करने वाले जनरल बिपिन रावत की तुलना ब्रिटिश जनरल डायर से की गई। पार्थो चटर्जी नाम के लेखक ने ऐसा काम किया है। आज देशभर में इस खबर को लेकर उबाल है। देश के कई लोग कह रहे हैं कि ऐसे शख्स को पाकिस्तान भेज दिया जाना चाहिए, जो देश की सेना के खिलाफ ही ऐसी बातें बोल रहा है। इसके बाद भी पार्थो चटर्जी का कहना है कि वो अपने बयान पर कायम है। भारतीय सेना के कई पूर्व ऑफिसर्स ने पार्थो चटर्जी की कड़े शब्दों में निंदा की है। आपको जलियांवाला बाग कांड याद होगा। जब जनरल डायर ने एक आदेश से निहत्थे भारतीयों पर गोली चलवा दी थी। पार्थो चटर्जी ने एक वेबसाइट ‘वायर’ के लिए ऐसा लेख लिखा है 2 जून को ये लेख लिखा गया और इसके बाद से पूरे देश में हड़कंप मच गया।
आज देशभर के कई लोग पार्थो चटर्जी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी पार्थो चटर्जी अपने बयान पर कायम हैं। आपको याद होगा इससे पहले कश्मीर में पत्थरबाजों पर लगाम पाने के लिए भारतीय सेना ने एक पत्थरबाज को जीप के आगे बांध दिया था। पार्थो चटर्जी ने इस बारे में लिखा कि कश्मीर इस वक्त ‘जनरल डायर मोमेंट’ से गुजर रहा है। पार्थो ने लिखा कि जलियावाला बाग कांड और कश्मीर में भारतीय सेना की कार्रवाई एक जैसी ही हैं। चटर्जी ने इसके आगे लिखा है कि आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कश्मीर में चल रही 'डर्टी वॉर' का जिक्र नहीं किया। इसके बाद चटर्जी ने लिखा कि इसे केवल ड्यूटी कहकर पल्ला झाड़ा गया। चटर्जी ने आगे लिखा कि जलियांवाला बाग में हिंदुस्तानियों को मारने वाला जनरल डायर भी इसे अपनी ड्यूटी समझता था। इस लेख के बाद से देशभर में गुस्से की आग है। चटर्जी के खिलाफ आर्मी के पूर्व ऑफिसर्स एकजुट हो गए हैं।
किसी का कहना है कि कश्मीर से आतंकवाद मिटाने से पहले ऐसे आतंकियों को देश से बाहर भेज देना चाहिए। पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक का कहना है कि ये शर्मनाक है। इसके अलावा ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा का कहना है कि इस लेख के पीछे लेखक का छिपा हुआ अजेंडा है। आर्मी के पूर्व ऑफिसर्स अब चटर्जी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कर्नल वीएन थापर का कहना है कि चटर्जी ने जानबूझकर ये कदम उठाया है। सवाल ये है कि जो आर्मी देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से भी नहीं कतराती है, जो आर्मी देशवासियों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर देती है, उस आर्मी के लिए अगर ऐसा कहा जा रहा है तो क्यों ? देशभर से आवाज उठ रही है कि पार्थो चटर्जी को देश से बाहर कर दिया जाए। लेकिन वो लेखक अभी भी अपनी बात पर अड़े हैं। अब देखना ये है कि जनरल बिपिन रावत के लिए ऐसे शब्द लिखने वाले इस लेखक पर कब कार्रवाई होती है।