image: Saru dabral success story

उत्तराखंड की बेटी...हाथों में हुनर और सांसों में पहाड़..ये है 'सरु' की अतुल्य ‘वत्सला’ !

Jun 9 2017 12:37PM, Writer:मीत

कुछ कहानियां अलग होती हैं। सबसे अलग, कुछ अलहदा...जिसमें अपनेपन की मिठास घुली हो। अपनापन... आज उत्तराखंड इसी फलसफे पर तो जी रहा है। कोई पहाड़ी कुछ बड़ा काम कर दे तो गाहे-बगाहे हर उत्तराखंडी का सिर फक्र से ऊंचा होता है, गर्व से सीना फूल जाता है। कुछ ऐसे ही हैं हम पहाड़ी। अपना बनाने का हुनर हर पहाड़ी में कूट कूटकर भरा है। किसी भी हुनर से हम सामने वाले की आंखों के वक्त को चुरा लेते हैं। कुछ ऐसा ही वो सरोजनी कर रही है। जिनका परिवार कभी टिहरी में रहा, फिर देहरादून आए, फिर दिल्ली गए। लेकिन पहाड़ों को दिल से कोई कैसे निकाले? ये तो सांसें हैं, कोई इन्हें अलग करता है भला ? दिल्ली से सरोजनी मुंबई गई और मुंबई से पहाड़ों के नाम एक सौगात दे गई। वैसे सरोजनी डबराल को आप सरू डबराल के नाम से ज्यादा जानते होंगे। हाथों में हुनर हो, तो कुछ भी हो सकता है। सरू के पास पेंटिग का हुनर था। इस हुनर का इस्तेमाल बखूबी किया गया।

कैनवास पर कल्पना की कूची चली तो कुछ अद्भुत तैयार हुआ। इस अद्भुत पेंटिंग का नाम दिया गया ‘वत्सला’। वत्सला यानी प्यार फैलानी वाली। सरू ने राज्य समीक्षा से बात की और बताया कि ये पेंटिंग ‘वत्सला’ सिर्फ पहाड़ की नारी को समर्पित है। इस तस्वीर के जरिए दिखाया गया है कि पहाड़ की नारी अगर प्यार की नदी है तो शक्ति का स्वरूप भी है। आप पेंटिग में देख सकते हैं कि किस तरह से इसे तैयार किया गया है। ये वो ही परिधान है, जो उत्तराखंड की नारियां पहना करती थी। चेहरे पर तेज, आंखों में असीम प्यार, संस्कृति के लिबास में ढकी ‘वत्सला’। इस पेंटिंग को हर जगह सराहा गया। सरू कहती हैं कि गांव में उनकी पूफु (बुआ) ऐसा परिधान पहनती थी। दिमाग में सब कुछ पहले से तैयार हो गया था, बस इसे अब एक रूप देने की कोशिश की गई। सरू आज भले ही मुंबई में रहती हों, लेकिन उत्तराखंड के लिए उनका दिल धड़कता है।

इसके बाद सरू ने एक और पेंटिंग तैयार की, जिसका नाम दिया गया ‘अभी छों मैं’। खासकर इस पेंटिंग को आप देखेंगे तो हैरान हुए बिना नहीं रह पाएंगे। पलायन को दिखाती ये पेंटिग उन लोगों के दिल पर गहरा असर छोड़ती है, जो पहाड़ छोड़कर कहीं चले गए हैं। वास्तव में सरू ने मुंबई में रहकर उत्तराखंड को जिया, हालांकि सरू कहती हैं कि उनकी कोशिश रहेगी कि उत्तराखंड में जल्द ही अपनी पेंटिंग्स का एक एग्जीबिशन लगाया जाए। आपको जानकर हैरानी भी होगी कि सरू डबराल एक बेहतरीन गायक भी हैं। आप सोशल मीडिया पर उनके गीत सुन सकते हैं। यानी हाथों में हुनर तो है ही साथ में गले में मिठास भी है। ऐसे तैयार हुई है उत्तराखंड की बेटी सरू, जो उ्तराखंड को हर वक्त जिया करती है, जिसके लिए उत्तराखंड जान से कम नहीं, सम्मान से कम नहीं। उत्तराखंड को भी ऐसी बेटियों पर गर्व है, जो कहीं भी रहें लेकिन अपनी भूमि का मान बढा़ने में कोई कसर नहीं छोड़ती। बाकी आप ये वीडियो जरूर देखिए।


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