उत्तराखंड का छोरा धाकड़ है,कुश्ती में देश को दिलाया गोल्ड मेडल
Jun 12 2017 11:54AM, Writer:मीत
हर उत्तराखंड के लिए गर्व से लबरेज हो जाने वाली खबर आ गई है। उत्तराखंड के छोरे में कुश्ती में देस को गोल्ड मेडल दिलाया है। ऋषिकेश के उभरते हुए पहलवान लाभांशु शर्मा ने अपने करियर के पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में ही भारत को गोल्ड मेडल दिया दिया। इसी के साथ साबित हो गया है कि देवभूमि भी ऐसे ऐसे ताकतवर और हुनरमंद युवाओं को पैदा कर रही है, जो देश ही नहीं बल्कि दुनिया में अपना लोहा मनवा रहे हैं। नेपाल के काठमांडू में आयोजित हुई इंडो-नेपाल कुश्ती चैंपियनशिप में लाभांशु ने नेपाल आर्मी के पहलवान को ही चारों खाने चित कर दिया। आपको बता दें कि नेपाल के काठमांडू में सात से 10 जून तक चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था। इसमें लाभांशु शर्मा ने 120 किलोग्राम भार वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व किया। इसके साथ ही लाभांशु ने इतिहास भी रच दिया। उत्तराखंड के हर युवा को लाभांशु से सीख लेनी चाहिए। अगर हिम्मत हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता बल्कि और भी ज्यादा आसान होता है।
राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक हासिल कर चुके पहलवान लाभांशु के करियर का ये पहला इंटरनेशनल मुकाबला था। लाभांशु शर्मा का कहना है कि चैंपियनशिप में उनका पहला मुकाबला नेपाल के पहलवान से हुआ। इसमें वो 8-0 से विजयी रहे। सेमीफाइनल में उन्होंने भूटान के पहलवान पर एकतरफा जीत दर्ज की। लाभांशु ने सेमीफाइनल मुकाबला 7-0 से जीता। अब बारी थी फाइनल की। फाइनल में नेपाल आर्मी के पहलवान ने लाभांशु को चुनौती दी। रोमांचक रहे इस मुकाबले में लाभांशु ने 4-2 से जीत हासिल कर दी। इसके साथ ही लाभांशु ने अपने इंटरनेशनल करियर का पहला पदक भी हासिल कर दिया। गर्व है देवभूमि की माटी को ऐसे लालों पर, जो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में जाकर भी अपनी मातृभूमि का मान बढ़ा रहे हैं। इन युवाओं से उत्तराखंड के कई युवाओं को सीखने की काफी जरूरत है।
ऋषिकेश के चंद्रेश्वर नगर निवासी लाभांशु शर्मा वर्ष 2015 में राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं। नेशनल स्कूल गेम्स में उत्तराखंड को कुश्ती का पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले लाभांशु राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती में कई पदक जीत चुके हैं। लाभांशु का चयन जुलाई में दुबई में होने वाली एशिया यूथ चैंपियनशिप के लिए भी हो चुका है। लाभांशु का लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण जीतना है। उन्होंने बताया कि वो जल्द ही ऋषिकेश लौटेंगे।इसके बाद वो कुनाऊं गांव स्थित अपने कुश्ती के अखाड़े में युवाओं के लिए कैंप भी आयोजित करेंगे। उन्हें अखाड़े में कुश्ती के लिए रेसलिंग मैट की जरूरत है, इसके लिए राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई है। राज्य समीक्षा का मानना है कि ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को हर तरह से मदद की जानी चाहिए, जिससे आने वाले भविष्य में उत्तराखंड से और भी ऐसे बड़े खिलाड़ी पनप सकें।