उत्तराखंड के इन 78 गावों के लिए बड़ा अलर्ट, मंडरा रहा है भूस्खलन का खतरा
Jun 13 2017 9:05PM, Writer:मीत
उत्तराखंड से इस वक्त की बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि चमोली जिले में मानसून को लेकर आपदा प्रबंधन की टीम सतर्क हो गई है। उत्तराखंड पर आपदा का कहर बार बार देखा गया है। हर बार हर मौसम में देवभूमि आपदा की मार झेलती है। इस बीच कहा जा रहा है कि चमोली जिले के 78 गांवों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ये 78 गांव भूस्खलन की चपेट में कभी भी आ सकते हैं। इस बात की जानकारी भूगर्भ वैज्ञानिकों को भी है और आपदा रहात टीम को भी है। इसे देखते हुए राहत और बचाव के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने 5 टीमों की मांग की है। इससे पहले यानी पिछली बार इस जिले में आपदा प्रबंधन की दो ही टीमें तैनात थी। हमने आपको पहले भी बताया था कि चमोली जिला आपदा के लिहाज से अतिसंवेदनशील जिलों में से एक है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ जिले भी अति संवेदनशील जिलों की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा भी इस खबर से जुड़ी कुछ जरूरी बातें हैं।
भूगर्भ वैज्ञानिकों का कहना है कि इन जिलों पर आपदा की मार कभी भी पड़ सकती है। चमोली में 78 गांव भूस्खलन से प्रभावित हैं। ऐसे में बारिश के दौरान आपदा प्रभावित गांवों के लोगों को एक अदद जगह ढूंढना मुश्किल हो जाता है। चमोली के यात्रा रूट पर भूस्खलन से भी इस बार आपदा प्रबंधन ने पांच रेस्क्यू टीमों की मांग की है। इन रेस्क्यू टीमों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया जाएगा। इससे समय से राहत एवं बचाव कार्य शुरू हो सकेगा। आपदा महकमे ने विकास खंड स्तर पर भी लोगों की अलग अलग टीमें तैयार की हैं। विकास खंड स्तर पर अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर रेस्क्यू टीम में शामिल किया गया है। ये टीम जिला मुख्यालय और बाकी और जगहो से राहत एवं बचाव कर्मियों के आने तक मौके पर मोर्चा संभालेंगी। कहा जा सकता है कि वरक्त से पहले ही इस बार टीमें सक्रिय लग रही हैं। हालांकि विस्थापन को लेकर शासन गंभीर नहीं दिख रहा है।
आपदा प्रबंधन ने 17 गांवों के विस्थापन का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इनमें से अब तक सिर्फ एक गांव फरकंडे का ही विस्थापन हुआ है। इसके साथ ही जिलास्तर पर इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम का भी गठन कर दिया गया है। कहा ये भी जा रहा है कि आपदा से बचने के लिए तहसील स्तर पर भी इकाइयां बनाई गई हैं। इन टीमों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है । 16 जून को इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम की मॉकड्रिल होगी। इस दौरान आपदा से बचने की हर संभव तैयारी की जाएगी। किस तरह से आपदा के वक्त लोगों को राहत पहुंचाई जाए। किस तरह से लोगों की मदद की जाएगी, इस बात की सारी ट्रेनिंग इस मॉक ड्रिल में दी जाएगी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी का कहना है कि इस बार आपदा राहत एवं बचाव कार्य के लिए पांच टीमें शासन से मांगी गई है। विकास खंड स्तर पर भी अधिकारियों को ट्रेनिंग दी गई है। इसके साथ ही उनका कहना है कि इसके लिए आपदा महकमा हर वक्त सतर्क है।