image:  Success story of pandavaas part two

Video: उत्तराखंडियों को उत्तराखंड से जोड़ दिया…’पांडवाज’ अब सिर्फ नाम नहीं मिसाल बन गया...इस तरह से...

Jun 16 2017 2:10PM, Writer:मीत

(इससे पहले पार्ट में हम आपको बता चुके हैं कि किस तरह से पांडवाज ने अपना सफर शुरू किया अब आगे पढ़िए ) आंखों के आगे बचपन और उस बचपन में छुपी कई यादें, यादों को टोकरी से निकलते फूल और उन फूलों की महक से गूंजती हमारी देवभूमि। देवभूमि बदल रही थी। आंखें एक नया सपना देख रही थी। ‘पांडवाज’ हर पहाड़ी की आंखों के तारे बन रहे थे। ये तीन भाई अपने अगले काम में जुट गए। राज्य समीक्षा से बात करते हुए ईशान डोभाल कहते हैं कि अब कुछ नया करना था। लेकिन नया किस तरह का होगा। ईशान का कहना है पलायन तो हो रहा है और इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता। लेकिन जो पलायन कर रहे हैं क्या वो साल में एक बार भी कभी अपने गांव लौटकर वापस आए ? क्या उन्होंने कभी अपने गांव की संस्कृति को अपने साथ बनाए रखा ? पांडवाज ने नया सपना बुन लिया। उन लोगों तक उनके गांव का रैबार देना है, जो अपनी मिट्टी छोड़ चुके हैं, भूल चुके हैं।

इसी उधेड़भुन में पांडवाज का दिन बीत रहा था, रात निकल रही थी। अब सवाल ये था कि कैसे इस नए पैकेज को लोगों के सामने पेश किया जाए। हर किसी ने ‘फुलारी’ महोत्सव मनाया है। हमारा बचपन इससे जुड़ा है, हमारी यादों में फ्योंली और बुरांस के फूलों की वो टोकरियां हर बार ताजा होती हैं। ईशान कहते हैं कि कुणाल के दिमाग में ये बात आ गई। ‘फुल फुल माई दाल चौंल दे, घोघा देवा फ्योंल्या फूल’। संगीत हर कोई लाता है लेकिन उस संगीत को पेश कैसे किया जाए, ये कला पांडवाज अच्छे तरीके से जानते हैं। हुनरमंद हार नहीं मानते। फिर क्या था तैयार हुआ ‘फुलारी’। यकीन मानिए आपने ये गीत एक बार नहीं पचास बार सुना होगा, पचास बार सुनकर भी आपको ये गीत नया लगता होगा। आप पहाड़ों से दूर रहते हैं तो ये गाना सुनकर भगवान से ये प्रार्थना करते होंगे कि ‘राजी रय्यां, खुशी रय्यां मेरु गढ़देस ’। ये कैसे लोग हैं जो हमारे बचपन को हमसे मिला रहे हैं ?

अब सवाल ये है कि फुलारी गाना आने के बाद क्या नया हो रहा है ? क्या खास है ? तो जनाब ये बात जान लीजिए कि फुलारी का असर बॉलीवुड तक हो रहा है। क्या आपने आज तक बॉलीवुड की किसी फिल्म में ‘फुलारी’ या ’फूलदेई’ से जुड़ा कोई गाना सुना है ? अब जरूर सुनिएगा। दरअसल सलमान खान की नई फिल्म आ रही है ट्यूबलाइट। इसमें आपको एक गाने के बीच में कोरस ‘फूलदेई’ का गीत गाते मिलेंगे। क्या माना जाए ? क्या ये पांडवाज का ही असर है। हम कह रहे हैं कि है। जी हां पहाड़ के इन नौजवानों ने ऐसा कुछ कर दिखाया कि बॉलीवुड भी अब पहाड़ की संस्कृति को अपनाने लगा है। फुलारी कुछ ऐसे तैयार हुआ था मानों ये इतिहास ही रचेगा। उन वादियों की तरफ लेकर गए हमें ये पांडवाज। हमारे सपनों को हमारी आंखों के सामने लेकर आए ये पांडवाज। हमारी यादों की ‘फुलारी’ एक टोकरी में भरकर लाए हैं ये पांडवाज। उत्तराखंड के फूलों की महक को विदेशों तक पहुंचा गए ये जबरदस्त पांडवाज।

उत्तराखंड में ‘ढिंनचैक’ गानों का तोड़ निकाल लाए हैं ये पांडवाज। 4 महीने में कोई गाना 4 लाख से ज्यादा बार देखा जाए, पहाड़ों में ऐसा बहुत कम होता है, लेकिन ये कर दिखाने वाले हैं ये पांडवाज। शुक्रिया पांडवाज उत्तराखंडियों को उत्तराखंड से मिलाने के लिए। शुक्रिया पांडवाज हमें हमारे गांवों से जोड़े रखने के लिए। क्या आप जानते हैं कि आगे क्या आने वाला है ? इस जून के आखिर या फिर जुलाई की शुरुआत में पांडवाज आपके लिए एक बड़ा तोहफा लेकर आ रहे हैं। टाइम मशीन-3 आने वाला है। इस बार तो इस गीत का इंतजार पूरे उत्तराखंड को बेसब्री से है। हालांकि हम इस बारे में आपको कुछ ज्यादा नहीं बता पाएंगे। सस्पेंस को सस्पेंस ही रहने दिया जाए तो अच्छआ होगा। इंतजार कीजिए, क्योंकि अच्छी खबर का इंतजार जरा सा अच्छा ही लगता है। एक बार फिर से पांडवाज को राज्य समीक्षा की तरफ से उज्जवल भविष्य की ढेरों शुभकामनाएं। जय उत्तराखंड


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