जिसने केदारनाथ में तबाही मचाई, उसी से ऐसे संवरेगी देवभूमि की शान
Jun 19 2017 6:45AM, Writer:मीत
साल 2013 की केदारनाथ आपदा तो आपको याद होगी। इस दोरान केदारनाथ समेत उत्तराखंड के कई गांवों में बहत कुछ तबाह हो गया था। लेकिन साल 2013 में केदारनाथ में जिस वजह से तबाई मची, अब वो ही बाबा केदार के धाम को संवारने में काम आ रहे हैं। इस वक्त केदारनाथ धाम को पहले की तरह खूबसूरत बहनाने के लिए दिन रात एक किया किया जा रहा है। इसे हर तरह से संवारने की कोशिशें की जा रही हैं। आपदा के दौरान केदारनाथ में विशालकाय बोल्डरेस की वजह से तबाही मच गई थी। लेकिन अब इन्हं बोलडर्स का यूज मंदिर को संवारने में हो रहा है। राजस्थान के रहने वाले 17 कारीगरों को खासतौर पर इस काम के लिए बुलाया गया है। ये कारीगर इन बोल्डरों को काटकर तराश रहे हैं। ये कारीगर इस मंदिर और परिसर को मजबूती देने के साथ उसकी खूबसूरती को भी निखार रहे हैं। बताया जा रहा है कि तराशने के बाद ये पत्थर मजबूत होने के साथ मुलायम भी दिख रहे हैं।
बताया जा रहा है कि अब तक 500 से ज्यादा बोल्डर्स को कारीगर अपने हाथों से बेहतरीन नक्काशी दे चुके हैं।अब तक इन बड़े बोल्डर से 500 से ज्यादा पत्थर तराशे जा चुके हैं। जून 2013 की 16 और 17 जुलाई को मंदाकिनी और सरस्वती नदी के सैलाब ने केदारनाथ धाम के साथ साथ पहाड़ों के भूगोल को ही बदल दिया था। इस सैलाब के साथ केदारनाथ में चारों तरफ बड़े-बड़े बोल्डर आकर जमा हो गए थे। आज भी यहां बड़े बड़े बोल्डर फैले हैं। बीचे दो साल से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इन बोल्डर्स से ही केदार धान की खूबसूरती को बढ़ाने का काम कर रहा है। इन्हीं बोल्डरों से मंदिर को मजबूत करने के साथ सुंदरता को बढ़ाने का काम किया जा रहा है। 2015 से अब तक इस सिलसिले को अलग अलग फेज के माध्यम से चलाया जा रहा है। राजस्थान के कुम्हेरी और अर्जुनपुर गांव के 17 से ज्यादा कारीगर इस काम में लगे हुए हैं।
2015 मई से ही इन कारीगरों को इस काम पर लगा लिया गया था। मई से नवंबर महीने के बीच इन कारीगरों का काम विशाल बोल्डर्स को काटकर डिजायनर शक्ल देना है। विशालकाय बोल्डरों को काटकर ब्लॉकनुमा और अन्य डिजाइनर आकार दिया जा रहा है। इन कारीगरों में भवर लाल, मुकेश, देशराज, मुन्ना, शिवराज, राजपाल समेत कई कारीगर हैं, जो लगातार इस काम में लगे हुए हैं। ये कारीगर पहले पेंसिल से डिजाइन तैयार करते हैं और पत्थर को आकार देते हैं। इसके बाद एक फीट लंबे और आधा फीट चौड़े पत्थर को तराशकर तैयार करने में कम से कम एक दिन का वक्त लग जाता है। अधिकारियो के मुताबिक केदारनाथ मंदिर को सुरक्षित और सुंदर बनाने के लिए मंदाकिनी नदी किनारे बोल्डरों को काटकर पत्थर तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में लग रहा है कि आने वाले वक्त में केदार धाम और भी खूबसूरत बनेगा और ज्यादा से ज्यादा यात्रियों का ध्यान अपनी तरफ खींचेगा।