केदारनाथ से फिर हो रहा है खिलवाड़, वैज्ञानिकों ने दी विनाशकारी चेतावनी
Jun 19 2017 12:30PM, Writer:जतिन
केदारनाथ मंदिर के बारे में एक और बात सामने आई है।मंदिर के आसपास भवन निर्माण कार्य हो रहे हैं, और ये किसी भी हाल में ठीक नहीं है। ये क्षेत्र एवलांच के लिए संवेदनशील है, इस वजह से यहां किसी भी प्रकार का निर्माण सुरक्षित नहीं है। ये बात करीब 23 साल पहले भारतीय भू-गर्भीय सर्वेक्षण के वैज्ञानिक भी बता चुके हैं। कहा जाता है कि अगर इस रिपोर्ट पर ध्यान दिया जाता तो जून 2013 की आपदा में केदारनाथ में इतने बड़े स्तर पर तबाही नहीं होती। जीएसआई के वैज्ञानिक दीपक श्रीवास्तव और उनकी टीम ने 1991 से 1994 तक केदारनाथ मंदिर और आसपास के हालातों का अध्ययन किया था। 4 साल में टीम ने कई बार हर मौसम के हिसाब से रिपोर्ट तैयार की थी। ऑन इंटीग्रेटेड आइस, स्नो एवलांच जियोलॉजिकल स्टडीज इन मंदाकिनी वैली अराउंड केदारनाथ, डिस्ट्रिक्ट चमोली, उत्तर प्रदेश नाम से ये रिपोर्ट जारी की गई है।
इसमें गया कि केदारनाथ मंदिर के आसपास निर्माण कार्य किसी भी तरह से ठीक नहीं है।केदारनाथ समुद्र तल से 3581 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसके साथ ही ये तीन ओर से पर्वतों और ग्लेशियरों से घिरा हुआ है। केदारनाथ और गौरीकुंड बाजार दो नदियों सरस्वती और मंदाकिनी के मध्य में संकरे भाग में स्थित है। ऐसे में मंदिर के आसपास किसी भी प्रकार का निर्माण सुरक्षित नहीं है, लेकिन जीएसआई की रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए केदारनाथ में सरकारी और गैर सरकारी भवनों का निर्माण बेरोकटोक होता रहा। एक बार फिर से ऐसा देखा जा रहा है। लोगों ने यहां तीन मंजिले भवन तक तैयार किए। हैरानी ये है कि आपदा में जर्जर हो चुके लगभग डेढ़ सौ आवासीय और व्यावसायिक भवनों में 90 से ज्यादा को ध्वस्त कर पुरोहितों के लिए नए भवन बनाए जा रहे हैं, जिसमें 40 भवन तैयार होने वाले हैं। ऊपर से ये सभी भवन दो मंजिला है।
केदारनाथ में भवन निर्माण को लेकर 1980 में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग द्वारा सर्वेक्षण कराया गया, जिसके मुताबिक 1960 में धाम में सिर्फ एक दुकान थी। साल 1970 तक यहां चार दुकान हो गई थी, जबकि सरकारी और स्वायत्त संस्थाओं के 47 भवन बन चुके थे। भवनों का निर्माण होता रहा और 1980 तक केदारनाथ में 146 भवन गए थे। आपदा से पहले केदारनाथ धाम में 350 से ज्यादा भवनों का निर्माण हो चुका था। जीएसआई रिपोर्ट में गरुड़चट्टी को पूरी तरह से सुरक्षित बताया गया था। ये पूरा क्षेत्र एवलांच फ्री बताया गया है। जून 2013 की आपदा में भी गरुड़चट्टी सुरक्षित रहा। इतना जरूर है कि मंदाकिनी के तेज बहाव से नीचे से भूकटाव जरूर हुआ है। इस वजह से केदारनाथ में जो रहा है, वो शायद ठीक नहीं हो रहा है। ऐसे में भूगर्भ वैज्ञीनिकों की रिपोर्ट के मुताबिक ये सारे निर्माण केदारनाथ से 1 किमी दूर गरुणचट्टी में ही होने चाहिए।