image: Uttarakhand flood hero’s story set to hit the screen

देवभूमि के चमत्कार को बॉलीवुड का नमस्कार, परदे पर दिखेगी करिश्माई कहानी

Jun 30 2017 9:02PM, Writer:प्रगति

ये हौसला कैसे झुके, ये आरज़ू कैसे रुके मंजिल मुश्किल तो क्या, धुंधला साहिल तो क्या, तनहा ये दिल तो क्या, शायद डोर फिल्म के इस गीत के बोल को राजस्थान के विजेंद्र ने दिल से समझ लिया था। जी हां हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बॉलीवुड अब उत्तराखंड की एक ऐसी ही सच्ची घटना को परदे पर उतारने जा रहा है, जहां सभी उम्मीदें खत्म हो गई थी मगर एक शख्स का विश्वास बहुत गहरा था जिसने सभी सबूतों को झूठा साबित कर दिया, दरअसल ये घटना एक करिश्मे से कम नहीं हैं और ये कहानी आपको हर हाल में इमोशनल कर देंगी। आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि क्या ऐसा भी हो सकता है। चलिए अब उस घटना के बारे में बताते हैं जिस पर ये फिल्म बनने वाली है, जरा सोचिए आखिर कैसा होगा वो नजारा, जब मरी हुई पत्नी उसके पति को लंबे इंतजार और तमाम कोशिशों के बाद जिंदा मिल जाए, जी हां विजेंद्र सिंह राठौर और लीला की कहानी कुछ ऐसी ही है।

चारधाम यात्रा पर निकले विजेंद्र सिंह राठौर और उनकी पत्नी 2013 की केदारनाथ आपदा की चपेट में आ गए थे, केदारनाथ की त्रासदी में विजेंद्र सिंह राठौर ने अपनी पत्नी को खो दिया था जिसके बाद से विजेंद्र सिंह भूखे-प्यासे अपनी पत्नी को ढ़ूढते रहे और आखिर में 19 महीने भटकने के बाद उनको उनकी पत्नी आखिर मिल ही गई, जिसको आधिकारिक तौर पर मरा हुआ घोषित कर दिया गया था मगर विजेंद्र सिंह को यकीन था कि लीला जिंदा हैं। इस कपल की लव स्टोरी पर बनने वाली बॉयोप‌िक आपको भी इमोशनल कर देगी, 45 साल के विजेंद्र अलवर के रहने वाले साधारण व्यक्ति हैं जो अपनी पत्नी के साथ 2013 में चार धाम यात्रा के लिए निकले थे. उनकी बस जब उत्तराखंड पहुंची तो बाढ़ में फंस गयी। विजेंद्र ने अपनी पत्नी की तलाश में डेढ़ साल तक कम से कम उत्तराखंड के हजार गांवों की खाक छानी, इस दौरान उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

कभी सड़क पर सोये, तो कभी भूखे रहे इस संघर्ष में विजेंद्र का पुश्तैनी मकान भी बिक गया। सरकार ने मुआवज़ा देने की कोशिश की, मगर विजेंद्र ने मना कर दिया। वो मानने को तैयार नहीं थे कि उनकी लीला इस दुनिया में नहीं रही, विजेंद्र को यकीन था कि उनको लीला जरुर मिलेंगी। अब चार साल बाद इस संघर्ष भरी कहानी को बनाने का जिम्मा उठाया है सिद्धार्थ रॉय कपूर ने, खबरों की माने तो सिद्धार्थ इस कहानी से इतने प्रभावित हो गये हैं कि विजेंद्र से फ़िल्म बनाने के लिए राइट्स ख़रीद लिये और सुनने में आया है कि फिल्म का निर्देशन विनोद कापड़ी करेंगे। विनोद कापड़ी इससे पहले कई शानदार फिल्में पेश कर चुके हैं। लेकिन देखना होगा कि इस किरदार के लिए सिद्धार्थ किसको चुनते हैं। इस कहानी में एक पारिवारिक जीवन के संघर्षों की भी छवि देखने को मिलेगी और पति -पत्नी के प्रेम और विश्वास की एक अमर कथा से भी आपको रुबरु होने को मिलेगा। उम्मीद है कि ये फिल्म बड़े पर्दे पर शानदार प्रदर्शन करेगी।


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