उत्तराखंड का एक प्राइमेरी स्कूल रचेगा इतिहास, यहां से टिप्स लेंगे नीदरलैंड्स के छात्र
Jul 2 2017 7:15PM, Writer:कपिल
देशभर में इस वक्त सरकारी स्कूलों को लेकर काफी कुछ कहा जा रहा है। कभी कहा जाता है कि सरकारी और प्राइमेरी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बहुत ही नीचे स्तर का होता है। कभी कहा जाता है कि प्राइमेरी स्कूलों में किसी भी तरह की सुख सुविधाएं नहीं होती हैं। लेकिन इस बीच हम उत्तराखंड से आपके लिए एक अच्छी खबर लेकर आए हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में मौजूद है एक प्राइमेरी स्कूल। ये स्कूल श्यामपुर क्षेत्र के टाटवाला गांव में मौजूद है। इस स्कूल में नीदरलैंड के छात्र कुछ सीखने आ रहे हैं। इसके साथ ही नीदरलैंड के छात्र यहां कुछ सिखाएंगे भी। बताया जा रहा है कि यहां विदेशी छात्रों के दो दल आएंगे। इस महीने ये दल इस प्राइमरी स्कूल में रहेंगे। इस दौरान विदेश के छात्र और उत्तराखंड के इस प्राइनेरी स्कूल के छात्र एक दूसरे से अपनी बातें साझा करेंगे। इसके साथ ही एक दूसरे को अपने अनुभव भी साझा करेंगे। इसके साथ ही इस स्कूल में विदेशी छात्रों के स्वागत की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।
एक तरफ देशभर में प्राइमेरी स्कूलों के हाल पर चर्चा की जा रही है और दूसरी तरफ उत्तराखंड का ये स्कूल अलग ही कहानी गढ़ने जा रहा है। बताया जाता है कि नीदरलैंड में पढ़ाई के दौरान छात्रों को इंटर्नशिप के तौर पर कुछ तैयारियां कराई जाती हैं। इस दौरान वहां के छात्रों को आरामदायक जिंदगी छोड़कर कुछ वक्त ग्रास रूट लेवल पर काम करना पड़ता है। ये प्रोग्राम ग्लोबल कल्चर एक्सचेंज कार्यक्रम का ही हिस्सा होगा। 21 जुलाई और 25 जुलाई यहां नीदरलैंड के छात्रों के दो ग्रुप आएंगे। इस दौरान स्कूल में तमाम तरह की रचनात्मक गतिविधियां की जाएंगी। छात्रों को सिखाया जाएगा कि किस तरह से दूसरे के कामों में हाथ बंटाया जाता है। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि बच्चे स्कूल में श्रमदान भी करेंगे। इसके अलावा गांव में पौधरोपण का काम भी कराया जाएगा। साथ ही स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा गंगा स्वच्छता को लेकर जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा।
इसके साथ ही स्कूल का स्टाफ और छात्र भी विदेशी छात्रों के आगमन के लिए बेकरार हैं। स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि ये साझा अभियान स्कूल और गांव के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है। बताया जा रहा है कि नीदरलैंड के छात्रों को उत्तराखंड लाने के पीछे धीरेन्द्र शर्मा ने जबरदस्त कोशिशें की हैं। धीरेन्द्र शर्मा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन छत्तीसगढ़ के समन्वयक हैं। नीदरलैंड के बीसीपीएल कॉलेज के 13 छात्र पहले यहां पहुंचेंगे। इसके बाद नीदरलैंड के ही डब्ल्यूईईआरटी कॉलेज के 39 छात्र यहां पहुंचेंगे। अब आपको बताते हैं कि आखिर इस स्कूल का ही चयन क्यों किया गया है। दरअसल इस स्कूल ने नेशनल लेवल पर अपनी एक पहचान बनाई है। ये स्कूल आज यहां के शिक्षकों के बदौलत ई एजुकेशन का हब बन रहा है। सरकारी स्कूल होने के बाद भी यहां छात्र कॉन्वेंट स्कूलों की तरह ई एजुकेशन में पारंगत हैं। कुल मिलाकर कहें तो उत्तराखंड का एक प्राइमेरी स्कूल इस महीने इतिहास रचने की तैयारी कर रहा है।