बिपिन रावत और अजीत डोभाल की चाल, दो ‘पहाड़ी शेरों’ के आगे ढेर होगा ड्रैगन !
Jul 10 2017 9:03PM, Writer:Shantanu
भारत के सामने इन दिनों लगातार चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। पाकिस्तान पहले से भारत के लिए परेशानी बना हुआ है। वहीं अब चीन भी भारत के लिए दिक्कत खड़ी कर रहा है। आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को हमेशा चीन का साथ मिलता है। भारत की लाख कोशिशों के बाद भी चीन के अड़ंगे के कारण पाकिस्तान के आतंकी बच जाते हैं। मसूद अजहर पर चीन के कारण भी बैन नहीं लग पा रहा है। ऐसे में अब सिक्किम में चीन की दबंगई का जवाब देना जरूरी हो गया है। पाकिस्तान को काबू में करने के लिए तो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का नाम ही काफी है। पहाड़ी शेर डोभाल के नाम से पाकिस्तान की मीडिया में हड़कंप मच जाता है. दरअसल डोभाल ने पाकिस्तान को काफी पहले ही चेतावनी दे दी थी। अगर मुंबई हमले जैसा दूसरा हमला किया तो पाकिस्तान के हाथ से बलूचिस्तान निकल जाएगा।
हालिया सीमा विवाद पर जिस तरह से चीन अपनी दबंगई दिखा रहा है। उस पर एक और पहाड़ी शेर बिपिन रावत खुल कर सामने आ गए हैं। सेना प्रमुख बिपिन रावत ने साफ कहा है कि भारत जंग के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसका मतलब ये नहीं है कि भारत जंग की शुरूआत करेगा। ऐसा नहीं होगा, लेकिन अगर किसी ने भारत की संप्रुभता पर आंख डाली तो उसे करारा जवाब मिलेगा। चीन से निपटने के लिए ही सेना प्रमुख बिपिन रावत ने डोकलाम में भारतीय सेना को कैंप करने के लिए कह दिया है. हालांकि ये राजनीतिक फैसला माना जा रहा है, लेकिन इसके पीछे बिपिन रावत का ही दिमाग बताया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ डोभाल भी चीन को लेकर रणनीति बना रहे हैं। इस तरह से देखें तो दो पहाड़ी शेरों की दहाड़ से पाकिस्तान और चीन की हालत खराब है।
सबसे खास बात ये है कि बिपिन रावत सेना के जरिए चीन को अपनी ताकत दिखा रहे हैं तो वहीं डोभाल परदे के पीछे रहकर काम करने में यकीन करते हैं। डोभाल ने चीन और पाकिस्तान के लिए एक नहीं कई मौकों पर मुश्किल खड़ी की है। बलूचिस्तान में जहां से चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा हो कर गुजर रहा है वहां पर चीन की राह में रोड़े डोभाल ने ही डाले हैं। जिस तरह से बलूचिस्तान में आजादी का आंदोलन जोर पकड़ रहा है। उसके पीछे डोभाल का दिमाग बताया जा रहा है। आतंक, बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का हनन और पीओके में आजादी के नारे लगने के कारण पाकिस्तान परेशान है। वो बुरी तरह से घिर गया है। वहीं चीन के सामने बिपिन रावत और भारतीय फौज खड़ी है। ऐसे में साफ है कि इन दोनों देशों पर नकेल कसने के लिए देवभूमि के दो जूझारू लोग ही काफी हैं।