उत्तराखंड की बेटी पेरिस में रचेगी इतिहास, 3 नवंबर 2017 का दिन नहीं भूलेगी देवभूमि
Jul 11 2017 5:14PM, Writer:कपिल
कहते हैं कि प्रतिभा किसी भी चीज की मोहताज नहीं होती। वो आगे बढ़ती है और वक्त मिलने पर अपना जलवा दिखाती है। इस कहावत को उत्तराखंड की बेटी ने साबित कर दिखाया है। क्या आप हरिद्वार की रहने वाली रिद्धिमा पांडेय के बारे में जानते हैं ? अगर नहीं जानते तो आज इस बारे में जरूर जानिए। क्यों रिद्धिमा के बारे में जानकर आपको गर्व होगा। उत्तराखंड की 9 साल की इस मासूम सी बच्ची ने वो कर दिखाया है, जो बड़े बड़े धुरंधर नहीं कर पाए। रिद्धिमा ने अपने सामने प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित तरीके से दोहन होते देखा, जलवायु परिवर्तन पर गंभीरता जताई और सरकारों की लापरवाही को दुनिया के सामने लेकर आई। इसके लिए बकायदा इस बेटी ने नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल में केस दर्ज किया था। सिर्फ 9 साल की बच्ची ने इतना सब कुछ कर दिखाया। आज देश इस नन्हीं सी बच्ची की कामयाबी पर झूम रहा है। हैरानी की बात तो ये है कि अब इस छोटी सी बच्ची के विचार दुनियावाले सुनेंगे। तीन नवंबर 2017 का दिन उत्तराखंड के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा।
इस दिन नन्हीं सी रिद्धिमी पेरिस में होने वाली कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगी। जलवायु परिवर्तन के बेरे में रिद्धिमा क्या सोचती हैं, ग्लोबल वॉर्मिंग के बारे में ये मासूम क्या सोचती है, उसे दुनिया अब कान खोलकर सुनेगी। ऐसी है हमारी देवभूमि की बेटी रिद्धिमा। इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन फ्रांस लिबर्टीज जैसी कई संस्थाओं के द्वारा किया जा रहा है। गर्व की बात ये है कि इस कॉन्फ्रेंस में उत्तराखंड की ये मासूम सी बेटी भी प्रतिभाग कर रही है। इसे लेकर रिद्धिमा काफी उत्साहित हैं। अब आपको बताते हैं कि किस तरह से रिद्धिमा को पर्यावरण की पेचीदगियां जानने का मौका मिला। दरअसल विरासत ने रिद्धिमा को जंगल के बारे में जानने की समझ दी है। रिद्धिमा के पिता का नाम दिनेश चंद्र पांडेय है। दिनेश चंद्र पांडेय वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाली ऑर्गेनाइजेशन वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया में फील्ड ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। इसके साथ ही रिद्धिमा की मां हरिद्वार डिविजन के वन विभाग में कार्यरत हैं।
रिद्धिमा इस वक्त 5वीं कक्षा में थी, जब उन्हें ग्लोबल वॉर्मिंग के बारे में जानने को मिला। रिद्धिमा ने ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर एक स्टोरी पढ़ी थी। बस यहीं से रिद्धिमा के मन में ये बात आ गई कि अगर हम ग्लोबल वॉर्मिंग का शिकार बने तो धीरे धीरे धरती काल के गाल में समा जाएगा। मासूम मन में इस उम्र में खेल और खिलौनों की बीतें आती हैं। जरा सोचिए इस प्यारी सी बच्ची के दिमाग में पर्यावरण बचाने की बात कक्षा 5 से ही आ गई थी। पिता का कहना है कि 29 मार्च 2017 को रिद्धिमा की तरफ से नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल में 54 पन्नों की याचिका दाखिल की गई। इस याचिका पर सुनवाई चल रही है। इस याचिका में पर्यावरण पर पड़ रहे असर, जीवन पर संकट, बीमारियां और ना जाने कितने प्वॉइंट्स रखे गए हैं। दुनिया में आपने किसी भी ऐसे बच्चे या फिर बच्ची का नाम नहीं सुना होगा, जिसने इतनी छोटी सी उम्र में ऐसा केस दाखिल किया हो। बस इस वजह ने रिद्धिमा को विदेशों में भी प्रसिद्धि दिलवा दी। अब पेरिस में होने वाली कॉन्फ्रेंस में रिद्धिमा को बुलाया गया है। उत्तराखंड की इस बेटी को वहां सम्मानित किया जाएगा।