Video: आज ये गढ़वाली गज़ल सुनिए...जगजीत सिंह, गुलाम अली को टक्कर दे रहे हैं पहाड़ी
Jul 12 2017 6:07PM, Writer:प्रगति
कुछ खास सुनना चाहते हैं आप ? दो मिनट के लिए किसी शांत सी जगह पर बैठ जाइए। दुनिया की दौड़ भाग से थोड़ा सा वक्त निकालिए और इस गज़ल को सुनिए। वैसे भी गज़ल सुनने वालों की दुनिया में कोई कमी नहीं है। उत्तराखंड में भी गज़ल के शौकीनों की कमी नहीं है। ऐसे में अगर आप गढ़वाली में लिखी गई इस गजल को सुनेंगे तो बार बार सुनते रहेंगे। आज उत्तराखंड के म्यूजिक की बात करें तो धूम धड़ाके से थोड़ा अलग है ये वीडियो। ये वीडियो सुनने और देखने से पहले इतना जरूर जान लीजिए कि अगर आप डीजे वाले गानों के शौकीन हैं तो ये वीडियो आपके लिए नहीं है। हां अगर आप बदलते पहाड़ के संगीत को सुनना चाहते हैं तो इस वीडियो को देखना आपके लिए बेहद जरूरी है। इस गीत के बोल हैं ‘मन की गेड़’। क्यों नहीं सुनना चाहेंगे आप इस गीत को ? शायद इस सवाल का जवाब आपके पास भी नहीं होगा। यकीन करेंगे आप कि आप पहाड़ों के बदलते संगीत के साक्षी बन रहे हैं। ‘मिन अपणी हथगुल्यों मां तेरो नौं लेख्याली’।
इस गाने को रणजीत सिंह और मनीषा मालकोटी ने गाया है। दोनों की बेहतरीन आवाज इस गाने को बार बार सुनने के लिए मजबूर कर रही है। उम्मीद से कहीं आगे, सोच से थोड़ा सा अलग और सुरों का अनूठा संगम है ये गीत। इसलिए एक बार सुनना जरूर चाहेंगे आप। इस गीत को राजकुमार भारती ने संगीत दिया है। किसी गज़ल में किस तरह का संगीत दिया जाता है, शायद राजकुमार भारती को अच्छे से पता है। इसके साथ ही इस गीत को एडिट गणश नैथानी ने किया है। राज्य समीक्षा का मानना है कि ऐसे गीतकार और संगीतकारों को अब कहीं रुकना नहीं चाहिए देश में हर किसी ने संगीत की दुनिया में अलग अलग तरीके से नाम कमाया है। किसी ने प्यार के गीतों की तरफ फोकस किया, किसी ने इंडियन क्लासिकल को अपना बनाया, किसी ने रैप गीतों को गाना शुरू किया। लेकिन आज जिस बात की सबसे ज्यादा चिंता है, वो ये है कि आखिर गजलों के घराने को कौन आगे बढ़ाएगा।
गर्व है हमें अपने पहाड़ों पर जहां संगीत की अलग अलग विधाएं आपको देखने को मिलेगी। यहां हर तरह का संगीत आपको सुनने और देखने को मिलेगा। हां इतना जरूर है कि इस गीत को लोगों के द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। गजब शब्दों से भरी ये गज़ल आज के युवा पहाड़ियों को सुनना काफी जरूरी है। ये गीत जगजीत सिंह और चित्रा के कॉम्बिनेशन की याद भी दिलाता है। कभी इन दोनों ने गज़लों की दुनिया पर राज किया था। भारत के संगीत को इन दोनों ने कभी एक अलग आयाम दिया था। अब लग रहा है कि पहाड़ के संगीत को रणजीत सिंह और मनीषा मालकोटी एक नया आयाम देने की कोशिश कर रहे हैं। वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि कोशिश करने वाले कभी हारते हैं। इन दोनों से भी ये ही उम्मीद है कि पहाड़ की गजलों को वो दुनिया के सामने एक अलग अंदाज में ही पेश करेंगे। फिलहाल राज्य समीक्षा की टीम की तरफ से इन दोनों को हार्दिक बधाई, ऐसे ही आगे बढ़ते रहिए और बेहतरीन संगीत का तोहफा पहाड़ों को देते रहिए।