इंसाफ मांग रही है पहाड़ की बेटी, दस ‘निर्भया कांड’ के बराबर हुई हैवानियत !
Jul 20 2017 4:00PM, Writer:कपिल
जब आवाज खामोश हो जाए तो एक आवाज उठनी चाहिए। जब मानवता की आंखों में काली पट्टी बंध जाए तो कोई इस पट्टी को खोलने वाला होना चाहिए। जब पहाड़ की बेटी से निर्ममता की जाए तो आवाज उठनी चाहिए। जी हां हम आज आपसे ये बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस आवाज को दबना नहीं चाहिए। क्यों एक बच्ची के गुनहगारों को सजा नहीं मिल रही। जिस देश में देवियों को पूजा जाता है, उस देश की जनता की आंखें क्यों बंद पड़ी हैं। हम बात कर रहे हैं कोटखाई शिमला हिमाचल की, जहां 8 जुलाई को मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना को अंजाम दिया गया। बताया जा रहा है कि जंगल के रास्ते एक 10वीं की छात्रा स्कूल से घर के लिए लौट रही थी। इस मासूम बच्ची के साथ बड़ी ही क्रूरता से 6 दरिंदों ने पहले तो सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद उसका गला दबा कर उसकी हत्या कर दी गई। दरिंदे यहीं नहीं रुके। इसके बाद उन्होंने इस बच्ची को जंगल मे निर्वस्त्र फेंक दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि बच्ची के हाथ और पैर भी तोड़ दिए गए थे।
उस मासूम बच्ची ने बचने का बहुत प्रयास भी किया। लेकिन हिमाचल पुलिस और प्रशासन ने इस केस को पहले तो गम्भीरता से नहीं लिया बाद मेंं छात्र संगठन Abvp के दवाब में कार्रवाई की। इसके बाद पुलिस ने कुछ लोगो को गिरफ्तार किया लेकिन बताया जा रहा है कि असली अपराधी अब भी गिरफ्त में नहीं है, जो की एक नेता का रिश्तेदार बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि हिमाचल सरकार हत्यारो को बचाने का पूरा प्रयास कर रही है। पहाड़ की ये मासूम गुड़िया आज इन दरिंदों की वजह से अपनी जिंदगी गवा चुकी है। आज कोई राजनीतिक पार्टी कोई NGo उसके साथ नही खड़ा है। आप सब से अपील है कि ज्यादा से ज्यादा गुड़िया के समर्थन में आये तथा उसे भी निर्भया की तरह इंसाफ दिलवाएं। आज इस गुड़ियां के लिए फेसबुक पर काफी कैंम्पैन चल रहे हैं। इस बीच आप उत्तराखंड के एक बड़े फेसबुक पेज ने भी ये मुद्दा उठाया है। ‘i love my uttarakhand sanskriti’ पेज पर गुड़िया के लिए कैंम्पेन चल रहा है और इसका असर भी दिख रहा है।
इस बीच अब धीरे धीरे इसका असर दिख रहा है। उतत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 18 जून को कैंडल मार्च का भी आयोजन किया जा रहा है। धीरे धीरे गुड़िया को इंसाफ दिलाने के लिए आवाज उठ रही है। ये आवाज हिमाचल से होते हुए उत्तराखंड तक पहुंच गई है। सवाल ये है कि आखिर कब गुड़िया के असली गुनाहगार को सजा मिलेगी ? आखिर कब पुलिस प्रशासन अपनी नींद से जागेगा ? आखिर कब गुड़िया को इंसफ मिल सकेगा ? इसे लेकर हर जगह आक्रोश देखा जा रहा है। एक आवाजा उठ चुकी है कि गुड़िया को इंसाफ दिलाना है। एक मांग उठ रही है कि गुड़िया के गुनहगार जल्द ही सलाखों के पीछ होने चाहिए। सरकार से कार्रवाई की मांग हो रही है। अगर असली गुनहगार सच में नेता का बेटा है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। कानून हर किसी के लिए एक समान है, ये बाद देश के हुक्मरानों को अच्छी तरह से पता होनी चाहिए। खैर अगर आप भी गुड़िया को इंसाफ दिलाना चाहते हैं तो इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।