देश के 14वें राष्ट्रपति बने रामनाथ कोविंद, जीत लिया रायसीना का रणक्षेत्र !
Jul 20 2017 4:58PM, Writer:शैल
रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति बन गए हैं। ये बात आखिरकार फाइनल हो गई है। रिटर्निंग अफसर अनूप मिश्रा ने इस बारे में ऐलान कर दिया है। कोविंद को इस वोटिंग में 66 फीसदी वोट मिले हैं। इसके साथ ही कई दलों ने कोविंद को राष्ट्रपति बनने पर बधाई दे दी है। इससे पहले ये साफ कहा जा रहा था कि कोविंद और मीरा कुमार में से कोई भी जीते, देश को के आर नारायणन के बाद दूसरा दलित राष्ट्रपति मिलना तय है। के आर नारायणन साल 1997 में राष्ट्रपति चुने गए थे। बीते सोमवार को इसके लिए वोटिंग की गई थी। ये पहला वक्त था जब राष्ट्रपति चुनाव के 65 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा 99 फीसदी वोट डाले गए। फाइनल आंकड़े बताते हैं कि कोविंद के खाते में 70 फीसदी से ज्यादा वोट हैं। इस बीच मीडिया ने कहा था कि उन्होंने विचारधारा के तहत ये लड़ाई लड़ी है। जीत और हार के सवाल पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा था। कुल मिलाकर कोविंद की जीत मीरा कुमार पर पूरी तरह से भारी पड़ गई है।
आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में राज्यों के वोट की काउंटिंग अल्फाबेटिकल बेस पर हुई। वोटों की काउंटिंग चार अलग-अलग टेबल पर की गई। 8 राउंड की ये काउंटिंग हुई। रिटर्निंग अधिकारी अनूप मिश्रा का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि राष्ट्रपति चुनाव में 99 फीसदी वोटिंग हुई है। लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल 776 सांसद हैं। लोकसभा और राज्यसभा से दो-दो सीट खाली हैं। इस वजह से 771 सांसदों को अपना वोट डालना था। इस बीच 768 सांसदों ने ही राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग की है। कोविंद की जीत से देश को एपीजे अब्दुल कलाम के बाद दूसरी बार एनडीए की पसंद का राष्ट्रपति मिला है। कोविंद का जन्म एक अक्टूबर 1945 को कानपुर की डेरापुर तहसील के परौंख गांव में हुआ था। 1978 में कोविंद सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर चुने गए थे। इसके बाद क्या हुआ इस बारे में भी हम आपको बता रहे हैं।
कोविंद 1980 से 1993 के बीच SC में केंद्र की स्टैंडिंग काउंसिल में भी रहे। इसके बाद कोविंद 1977 में इस वक्त पीएम रहे मोरारजी देसाई के पर्सनल सेक्रेटरी बने। साफ तौर पर कोविंद बीजेपी का दलित चेहरा हैं। पार्टी ने बिहार इलेक्शन में गवर्नर के तौर पर उनके दलित चेहरे को प्रोजेक्ट किया था। कोविंद दलित बीजेपी मोर्चा के अध्यक्ष रहे। इसके साथ ही कोविंद ऑल इंडिया कोली समाज के प्रेसिडेंट हैं। कोविंद 1994 से 2000 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। इसके बाद भी 2000 से 2006 तक राज्यसभा सदस्य रहे। साल 2015 के अगस्त महीने में कोविंद बिहार के गवर्नर अप्वाइंट हुए। 1990 में कोविंद ने घाटमपुर से एमपी का इलेक्शन लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद वे 2007 में यूपी की भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़े, पर ये चुनाव भी वो हार गए। उनके परिवार में पत्नी सविता, एक बेटा और एक बेटी है। इसके अलावा खास बात ये है कि कोविंद बीजेपी के नेशनल स्पोक्सपर्सन रह चुके हैं, लेकिन वे लाइमलाइट से इतने दूर रहते हैं कि प्रवक्ता रहने के दौरान कभी भी टीवी पर नहीं आए।