पहाड़ी पॉवर से चीन में अभी से हड़कंप, ये है अजीत डोभाल की दहाड़ का दम !
Jul 21 2017 4:40PM, Writer:kapil
इस महीने की 27 और 28 तारीख भारत और चीन के रिश्तों के लिए काफी अहम होने जा रही है। 28 जुलाई को ये पता चल जाएगा कि सीमा विवाद को लेकर चीन का क्या रिएक्शन होगा। देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन का दौरा करने जा रहे हैं। 26 तारीख को डोभाल चीन के लिए रवाना होने वाले हैं। दरअसल चीन में ब्रिक्स देशों के सुरक्षा सलाहकारों की मीटिंग होने जा रही है। इस मीटिंग से पहले ही चीन में तरह तरह की बयानबाजियां की जा रही हैं। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में डोभाल के दौरे से पहले ही लिखआ गया है कि भारत के पास डोभाल के दौरे के रूप में ये आखिरी मौका होगा। इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज साफ कर चुकी हैं कि अगर चीन डोकलाम से अपनी सेना नहीं हटाता है तो भारत भी किसी हाल में सेना नहीं हटाएगा। उधर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि डोकलाम में भारतीय सैनिकों ने चीन के इलाके में अतिक्रमण किया है।
इसके साथ ही अखबार ने लिखा है कि भारत की इस हरकत से पूरी दुनिया हैरान है। अखबार ने भारत को धमकी दी है कि ‘भारतीय सेना ताकत के मामले में चीन से काफी पीछे है। इसके साथ ही लिखा है कि भारत को बिना शर्त के अपनी सेना को वापस बुला लेना चाहिए। उधर भारत के NSA डोभाल ब्रिक्स देशों के एनएसए की बैठक में शामिल होने चीन जा रहे हैं। 26 जुलाई को डोभाल बीज़िंग पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि इस सीमा विवाद में भारत की तरफ से डोभाल विशेष दूत बनकर जा रहे हैं। चीन का मानना है कि डोभाल का चीन दौरा भारत के पास शांति के लिए आखिरी मौका होगा। इसके साथ ही अखबार ने लिखा है कि अगर ये मौका हाथ से निकल गया तो युद्ध ही आखिरी रास्ता होगा। अब आपको बता देते हैं कि आखिर अजीत डोभाल से पहले ही चीन में इस तरह की बातें क्यों हो रही हैं। इसके पीछे खास वजह है अजीत डोभाल का पहाड़ी दिमाग, जिसका चीन के पास कोई तोड़ नहीं है।
अजीत डोभाल रणनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। आपको पता होगा कि इससे पहले अजीत डोभाल पाकिस्तान के इलाके में जबरदस्त जासूसी कर चुके हैं। चीन इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि ये पहाड़ी शेर आने वाले वक्त में उस मुल्क के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। डोभाल के बारे में कहा जाता है कि वो परफेक्ट प्लानिंग करने के उस्ताद हैं। उनकी किसी भी प्लानिंग का किसी के पास कोई तोड़ नहीं होता। माना जा रहा है कि डोभाल का चीन दौरा सीमा विवाद के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। ऐसा पहली बार देखा जा रहा है कि दो देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव चल रहा है और किसी एक देश का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दुश्मन मुल्त का दौरा करे। ये सब कुछ डोभाल के चीते जैसे दिमाग की ही प्लानिंग है। पीएम मोदी को डोभाल पर इस कदर भरोसा है कि वो सब कुछ डोभाल के हवाले कर रहे हैं। अब देखना है कि 27 और 28 जुलाई को चीन से क्या खबर मिलती है।