image: Former cm harish rawat meets divya rawat

Video: दिव्या रावत की ‘स्वर्णिम’ सफलता, पूर्व सीएम ने देखा तो कह दी बड़ी बात

Jul 21 2017 7:41PM, Writer:कीर्ति

जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया था कि किस तरह से उत्तराखंड की बेटी दिव्या रावत ने कड़ी मेहनत से अपनी लैब में कीड़ाजड़ी जैसी बहुमूल्य औषधि तैयार की है। ये तो बस शुरुआत है, अभी दिव्या ना जाने ऐसे कितने काम कर उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाली हैं। दिव्या फिलहाल कीड़ाजड़ी को तैयार कर बेहद खुश हैं। उनकी इस खुशी में चार चांद तब लग गए, जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत उनसे मिलने के लिए पहुचे। दरअसल हरीश रावत खुद देखना चाहते थे कि आखिर किस तरह से उत्तराखंड की इस बेटी ने बहुमूल्य कीड़ाजड़ी को अपनी लैब में उगाया है। आपको याद होगा कि हरीश रावत के कार्यकाल के दौरान ही दिव्या रावत को मशरूम ब्रांड एंबेसडर चुना था। खैर पूर्व सीएम खुद इस बार दिव्या की लैब में आए और वहां का कामकाज देखा। दिव्या की मेहनत और लगन देखकर खुद हरीश रावत हैरान रह गए। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य में दिव्या को और भी नए प्रयोग करने की सलाह दी।

हमने आपको बताया था कि दिव्या रावत ने वो कर दिखाया है, जिसे पूरे भारत में अब तक कोई नहीं कर पाया है। प्राकृतिक रूप से पाई जानी वाली कीड़ाजड़ी को दिव्या रावत ने जब अपनी लैब में उगाया तो दुनिया हैरान हो गई। मशरूम की ये खास प्रजाति कॉर्डिसेप्स मिलिटरीज यानी कीड़ाजड़ी कहलाती है। कॉर्डिसेप्स मिलिटरीज को विदेशों में कॉर्डिसेप्स साइनेसिस के विकल्प के तौर में लैब में तैयार किया जाता है। बटन, मिल्की मशरूम और ओएस्टर की कई प्रजातियों के उत्पादन के बाद दिव्या ने कीड़ाजड़ी लैब में उगाने के बारे में सोचा था। ये दिव्या का ही जुनून था कि उन्होंने विदेशों में जाकर कीड़ाजड़ी की तकनीकि को सीखा था। वियतनाम,थाइलैंड और चीन जैसे मुल्कों में कीडाजड़ी का लैब में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। कुल मिलाकर कहें तो जिस काम के होने की उम्मीद सबसे कम थी, वो काम दिव्या ने अपनी लैब में कर दिखाया। अब जरा ये भी जान लीजिए कि आखिर कीड़ाजड़ी क्यों खास कही जाती है।

इसमें पेपटाइड्स, प्रोटीन, विटामिन बी-1, अमीनो एसिड, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। ये एक प्राकृतिक स्टीरॉइड है। एथलीट्स भी इसका सेवन करते हैं। चीन में परंपरागत चिकित्सा पद्धति में इसका इस्तेमाल किया जाता है। फेफड़ों और किडनी के लिए इसे जीवन रक्षक माना जाता है। उत्तराखंड में चमोली और पिथौरागढ़ के धारचूला में कीड़ाजड़ी प्राकृतिक रूप से 3500 मीटर ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाती है। कुल मिलाकर कहें तो ये एक तरह का जंगली मशरूम है, जो एक खास कीड़े की इल्लियों को मारकर उस पर पनपता है। मई से जुलाई के बीच में इसके पनपने का वक्त शुरू होता है। बर्फ पिघलने के साथ ही ये पनपती है। खैर इतना जरूर है कि इस खास जड़ी को दिव्या ने अपनी लैब में ही तैयार कर दिया है। ऐसा करने वाली देश की पहली महिला ग्रोवर का काम देखने खुद पूर्व सीएम हरीश रावत पहुचे और दिव्या को बधाई भी दी। उम्मीद है कि आगे चलकर दिव्या और भी लगन से इस काम को अंजाम देंगी।


  • MORE UTTARAKHAND NEWS

View More Latest Uttarakhand News
  • TRENDING IN UTTARAKHAND

View More Trending News
  • More News...

News Home