उत्तराखंड के लिए आज की GOOD NEWS, मलेशिया में दीपक नेगी ने जीते दो गोल्ड मेडल !
Jul 25 2017 10:05AM, Writer:नीतू
उत्तराखंड के लिए आज की शानदार खबर निकलकर सामने आई है। उत्तराखंड के लाल ने मलेशिया में दो गोल्ड मेडल अपने नाम कर दिए। इसके साथ ही साबित कर दिया कि उत्तराखंड के छोरे भी किसी से कम नहीं हैं। दीपक नेगी ने एक बार फिर से उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। दरअसल मलेशिया मॆं 31वीं मलेशियन इंटरनेशनल ओपन मास्टर्स एथेलिटिक्स चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था। भारत की तरफ से उत्तराखंड के कालाढूंगी के दीपक नेगी ने भी हिस्सा लिया। दीपक ने इस कॉम्पिटीशन में दो गोल्ड मेडल अपने नाम कर दिए। इसमें एक लॉन्ग जंप और एक ट्रिपल जंप में हासिल किया है। इसके साथ ही दीपन ने क्षेत्र और देश का नाम रोशन किया है। दीपक इससे पूर्व बंगलुरु में आयोजित नेशनल गेम्स में भी दो स्वर्ण जीत चुके हैं। इस वक्त दीपक गुड़गांव में तैनात हैं। कुल मिलाकर कहें उत्तराखंड की प्रतिभा अब निखरकर सामने आ रही है। अब ये भी जानिए कि किस तरह से दीपक ने अपनी तैयारियों के लिए वक्त निकाला था।
दीपक के बड़े भाई और कोच राजेंद्र सिंह नेगी स्पोटर्स समिति अध्यक्ष हैं। राजेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि 22 और 23 जुलाई को मलेशिया में आयोजित एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में लंबी कूद और ट्रिंपल जंप में भारत की ओर से दीपक ने प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्होंने बताया कि दीपक ने दो गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि दीपक ने पहली बार कुमाऊं विश्वविद्यालय की चैंपियनशिप 1998 में जीती थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके अलावा उन्होंने बताया कि इस साल जनवरी में बैंगलुरु में हुई नेशनल प्रतियोगिता में भी दीपक ने ने लंबी कूद और ट्रिपल जंप में दो स्वर्ण जीते थे। इसके बाद ही उनका अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ। दीपक ने राजकीय इंटर कालेज कालाढूंगी से इंटर की परीक्षा पास की। उबड-खाबड़ रास्तों को वे दौड़कर ही पार करते थे। दीपक ने एमकॉम की परीक्षा डीएसबी नैनीताल से पास की। इस वक्त वे गुड़गांव में एक प्रतिष्ठित निजी हॉस्पिटल में मैनेजर के पद पर तैनात हैं।
अब आपको बताते हैं कि दीपक की सफलता का फलसफा क्या है। दरअसल दीपक जब छोटे थए तो ऊबड़ खाबड़ पहाड़ी रास्तों से ही स्कूल जाया करते थे। इन रास्तों को वो दौड़कर, भागकर पार करते। उस वक्त से ही शायद दीपक के मन में एक अलख जग गई थी कि कुछ भी हो जाए, उत्तराखंड और देश के लिए बहुत कुछ करना है। धीरे धीरे दीपक का सपना बड़ा हुआ, तो उम्मीदें भी बढ़ने लगी। आखिरकार दीपक ने सोच ही लिया कि खेलों में भी नाम कमाना है। मंजिल सामने थी और दीपक के लिए रास्ता तैयार था, बस उस रास्ते पर चलना था और जीत हासिल करनी थी। दीपक हम तो ये ही कहेंगे कि ये तो स शुरुआत है और आगे बहुत बड़ा काम । इसलिए चलते रहिए और बढ़ते रहिए। मंजिलें आपका इंतजार कर रही हैं। दीपक के कोच का कहना है कि ये राज्य और क्षेत्र के लिए पहला अवसर है जब कालाढूंगी के खिलाड़ी ने पदक जीता है। राज्य समीक्षा की टीम की तरफ से आपको बहुत बहुत बधाई। इस खबर को शेयर भी करें ताकि देश को पता चल सके कि उत्तराखंड में कैसे कैसे एथलीट हैं।