image: Maa ausuya devi tample in chamoli

देवभूमि का शक्तिपीठ, जहां सच में मां के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति होती है !

Jul 26 2017 9:07AM, Writer:आदिशा

देवभूमि में पग पग पर देवताओं का वास है। कण कण में देव बसते हैं। उत्तराखंड में चमोली के सती माता मंदिर को लेकर अमेरिका में रिसर्च हुई है। इंस्टीय्टूट ऑफ मेसाचुसेट्स ग्लोबल साइंसेज के वैज्ञानिकों कहना है कि इस मंदिर में एक ऊर्जा विद्यमान है। ये ऊर्जा लगातार एक गोल चक्कर में इस मंदिर के चारों तरफ घूमती है। अुनूसूया मंदिर में हर बार हजारों की संख्या में श्रद्धालूं पहुंचते हैं, लेकिन पौष माह की पूर्णिमा का दिन यहां बेहद खास होता है। इस दिन दत्तात्रेय जयंती होती है और इस मौके पर इस मंदिर में मेला लगता है। अनूसूया माता के मंदिर में निसन्तान दम्पति संतान प्राप्ति के लिए माता से मन्दिर में मन्नत के लिए जाते हैं। माता अनुसूया के दरबार में मन्नत पूरी होने से किसी भी परिवार को जो संतान प्राप्ति होती है। उनका नाम अनुसूया रखा जाता है। ये मां मण्डल, देवधार, कठूड, सगर, बणद्वारा, खल्ला की अराध्य देवी हैं। सभी लोग माता को ज्वाल्पा, सर्वेस्वरी, अनुसूयामाता, चण्डिका इन सभी अलग रूपों में पूजते हैं।

कहते हैं कि माता अनुसूया के सतीत्व की परीक्षा लेने आए ब्रहमा, विष्णु, महेश खुद ही फेल हो गए थे और माता के सतीत्व के आगे नतमस्तक हुए । भले ही आज विज्ञान का युग है और लोग वैज्ञानिक विधि द्वारा संतान प्राप्ति कर सकते हों लेकिन मां अनूसूया का मंदिर आज भी निसंतान दम्पितियों की आस है। जहां पर जाकर लोग संतान की मन्नत मांगते हैं। खास बात ये है कि जब मन्नत पूरी हो जाए तो संतान का नाम अनुसूया ही रखा जाता है। आज भी पूरे क्षेत्र में कई बच्चों के नाम अनूसूया हैं। इस मंदिर में आने वाले भक्तों का मानना है कि सती माता अनुसूया पुत्र दायनी माता है। ये मां कभी भी किसी को खाली हाथ नहीं लौटाती है। बड़ी दूर- दूर से लोग यहां आते है, उनकी मन्नतें पूरी हो जाती हैं। कहा जाता है कि सतयुग में माता के सतीत्व की चर्चा तीनों लोकों में होने लगी इस पर मां लक्ष्मी और मां पावर्ती को गुस्सा आ गया कि धरती में हमसे बढ़कर कौन है।इस बात पर तीनों देवियों ने ब्रहमा विष्णु महेश को धरती पर जाकर माता अनुसूया के सतीत्व की परीक्षा लेने के कहा।

तीनों देवियां की जिद के आगे ब्रहमा, विष्णु, महेश मजबूर होकर धरती पर पहुंचते हैं। तीनों ऋषियों का वेश बदलकर माता के आश्रम में पहुंचकर माता को विश्राम कराने के लिए कहते हैं। इसके साथ ही माता के सतीत्व की परीक्षा के लिए माता से स्तन पान करवाने की शर्त रखते हैं। `त्रिदेवों की इस तरह की शर्त से परेशान माता अनुसूया अपने सतीत्व के बल से तीनों को बच्चे का रूप दे देती हैं। इसके बाद कई सालों तक तीनों को अपने पास रखती हैं। जब कई वर्षों तक पति की कोई खबर नहीं पहुंचती हैं तीनों देवियां अपने पतियों की खोज में धरती पर पहुंचती हैं। माता अनुसूया के पास अपनी गलतियों की माफी मांगती हैं। इसके बाद ही ब्रहमा, विष्णु, महेश अपने असल रूप में आ पाते हैं। यहां तीनों देव माता को आर्शीवाद देते हैं , कि जो भी इस दरबार में मन्नत मांगेगा वो पूरी होगी और निसंतान दम्पतियों को इस दरबार में आने से संतानोत्पति हो जाएगी। ये कहानी आपको अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें।


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