image: Research about churabadi taal in kedarnath

जिस झील ने केदारनाथ में मचाई थी तबाही, उस पर रिसर्च में फिर हुआ बड़ा खुलासा !

Jul 27 2017 10:53AM, Writer:जतिन

साल 2013 की केदारनाथ की तबाही को कौन भूल सकता है। वो तबाही जिसने हजारों सुहाग उजाड़ दिए, वो तबाही जिसकी वजह से एक पूरा गांव विधवाओं का गांव कहलाने लगा, वो तबाही जिसकी वजह से आज भी केदारखंड में लाशें मिल रही हैं। वो मंजर कैसा था, हर कोई जानता है। मौत सबकी आंखों के आगे तांडव कर रही थी। हर कोई बचने का सिर्फ एक रास्ता ढूंढना चाहता था। चोराबाड़ी ताल टूटा और ऐसा सैलाब आया कि सब कुछ चंद सेकंड में ही फना हो गया। वो चोराबाड़ी ताल ही था, जिसके टूटने से हजारों किलोमीटर तक नदियों में उफान बढ़ गया। सब कुछ बह गया, कुछ भी नहीं बचा था। वो चोराबाड़ी ताल क्या एक बार फिर से बड़ा खतरा बन सकता है ? ये वाकई सोचने का विषय है कि क्या ये ताल एक बार फिर से मानवजाति के लिए नाश का कारण बन सकता है? एक बार फिर से वैज्ञानिकों ने चोराबाड़ी ताल को लेकर रिसर्च की है। हालांकि ये रिसर्च 2013 से ही चली आ रही है।

साल 2013 केदारनाथ में तबाही मचाने वाले चौराबाड़ी ताल को लेकर वैज्ञान‌िकों ने एक और बड़ा खुलासा क‌िया है। वैज्ञान‌िकों का कहना है क‌ि अब तक चोराबाड़ी ताल केदारनाथ के ल‌िए बेहद खतरनाक बना हुआ था लेकिन अब ये ताल कहर नहीं बरपा सकेगा। आपदा के दौरान इस ताल का मुहाना क्षतिग्रस्त हो गया था। इस वजह से चोराबाड़ी ताल में पानी नहीं रुक रहा है। इसलिए आने वाले कई वर्षों तक केदारघाटी समेत निचले इलाकों के लिए चोराबाड़ी ताल अब खतरा नहीं है। अब आपको बता देते हैं कि ये खुलासा किसने किया है। य‌ खुलासा वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञा‌न‌िकों ने क‌िया है। उनका कहना है क‌ि केदारनाथ से चार क‌िलोमीटर पहले स्‍थ‌ित गांधी सरोवर पर अब फोकस क‌िया जा रहा है। इससे सामने आया है क‌ि आपदा के वक्त चौराबाड़ी ताल का मुहाना 8 से 10 मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गया था। ये ही वो वजह है कि इस ताल में अब पानी ठहर नहीं रहा है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके बाद से चोराबाड़ी अब ताल नहीं मैदान जैसा हो गया है। इसल‌िए आने वाले वक्त में ऐसी कोई भी संभावना नहीं है। इस रिसर्च में सामने आया है क‌ि आपदा के वक्त चौराबाड़ी ताल का मुहाना 8 से 10 मीटर क्षतिग्रस्त हो गया था। इसलिए ताल में अब पानी नहीं रुक रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है क‌ि चौराबाड़ी ताल में अब जो पानी है, वो ग्लेश्यिर और बरसात का है। इसके साथ ही खास बात ये है कि ये पानी ठहर नहीं रहा है, बल्कि सीधे बहकर जा रहा है। इसलिए केदारनाथ धाम समेत पूरे निचले इलाकों के लिए अब कोई खतरा नहीं है। चोराबाड़ी ताल को लेकर कई बातें कही जा रही थी, कुछ लोग ऐसा भ्रम फैला रहे थे कि इस ताल में एक बार फिर से पानी जमा हो रहा है और ये एक बार फिर से केदारनाथ के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। वैज्ञानिकों ने इस पर बड़ी रिसर्च की और रिपोर्ट को लोगों के सामने पेश किया है।


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