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टैक्स ना देने वाले सावधान, मोदी का हाईटेक ‘प्रोजेक्ट इनसाइड’, जानिए क्या है ये ?

Aug 1 2017 2:53PM, Writer:सुरेश

देखा जा रहा है कि टैक्स ना देने वालों पर पीएम मोदी लगातार कड़ी नजर रख रहे हैं। अब भारत सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने जा रहे हैं। इस बार ये तरीका नायाब और हाईटेक है। इस प्रोजक्ट का नाम है ‘प्रोजक्ट इनसाइड’। मोदी सरकार इस वक्त टैक्स चोरों को पकड़ने के लिए बड़े कदम उठा रही है। इस बार सरकार फेसबुक और बाकी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नजर रख रही है। टैक्स डिपार्टमेंट की नजर अब फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी है। जो लोग टैक्स ना देकर छुट्टियां बिताने के लिए मौज मस्ती कर रहे हैं, उन पर सरकार कड़ी नजर रख रही है। बताया जा रहा है कि भारत सरकार अगले महीने से बैंकों के साथ-साथ सोशल मीडिया साइट्स से सूचनाएं जुटाने जा रही है। सरकार का इरादा आपके खर्च करने के तौर-तरीके पर नजर रखने की है। इसके अलावा भी इस प्रोजक्ट के बारे में कुछ और भी खास बातें हैं, जिनके बारे में आपका जानना बेहद जरूरी है।

इसका मकसद घोषित आय के आंकड़े से मिलान करना है। इसके साथ ही टैक्स विभाग ऐसे लोगों के घरों पर छापेमारी कर सकता है, जो बेहद ही कम टैक्स चुका रहे हैं। 1,000 करोड़ रुपये की लागत से 'प्रॉजेक्ट इनसाइट' तैयार किया गया है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक डेटाबेस कहा जा रहा है। ये सीधे तौर पर टैक्स सुधार प्रक्रिया को मदद पहुंचाएगा। इसके साथ ही टैक्स का बेस बढ़ाने के लिए सरकार की मदद करेगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे टैक्स अधिकारियों के उत्पीड़न पर रोक लगेगी। यानी सीधे तौर पर टैक्स पेयर्स से टेक्स अधिकारियों का सामना नहीं होगा, बल्कि अब सामना सीधे सरकार से ही होगा। इससे पहले बेल्जियम, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे मुल्कों में ये तरीका अपनाया जा चुका है। हालांकि वित्त मंत्रालय ने प्रॉजेक्ट इनसाइट पर कोई टिप्पणी करने से मना किया है। दरअसल सरकारी आंकड़ा कहता है कि देश की कुल जीडीपी में टैक्स का हिस्सा सिर्फ 17 फीसदी है।

बताया जा रहा है कि प्रॉजेक्ट इनसाइट से देश की जीडीपी में टैक्स का हिस्सा 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ेगा। इस दौरान प्रोपर्टी और शेयरों में निवेश, क्रेडिट कार्ड से खर्चे, बैंकों में जमा धन और कैश से खरीदारी से जुड़े मौजूदा आंकड़ों को नए सिस्टम में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। तब जाकर एक सेंट्रल टीम उन लोगों से टैक्स डेक्लेरेशन फाइल करने के लिए ईमेल भेजेगी। जहां ईमेल की सुविधा नहीं होगी, वहां लेटर भेजे जाएंगे। जिनके रिकॉर्ड में अंतर पाया जाएगा, उन पर कार्रवाई की जाएगी। इस प्रक्रिया का दूसरा फेज दिसंबर से शुरू होगा जिसके बाद डेटा ऐनालिटिक्स सूचना जुटाकर इसकी पड़ताल करेगा। फिर हर व्यक्ति का अलग-अलग स्पेंडिंग प्रोफाइल तैयार किया जाएगा। इसके बाद पूछताछ में बिल्कुल नब्ज पर हाथ रखा जाएगा। वहीं, मई 2018 में इसका तीसरा फेज शुरू किया जाएगा। इसके अलावा चौथा फेज भी इसके बाद लॉन्च होगा। आखिरी चरण में आनेवाले दिनों में कर्ज की रकम डूबने की भविष्यवाणी करने या जोखिम की चेतवानी देने के लिए अडवांस्ड सिस्टम की शुरुआत हो जाएगी।


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