image: pm modi and amit shah political power

राजनीति के ‘सुल्तान’ पीएम मोदी और शाह, उत्तराखंड समेत पूरे देश में ऐसे किया शंखनाद !

Aug 9 2017 5:21PM, Writer:kapil

पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने राजनीति की पिच पर ऐसी बैटिंग की है कि विरोधी गेंदबाजों की यॉर्कर पर भी सिक्स लगा दिया। ऐसा ही कुछ चल रहा है आजकल देश की राजनीति में। सबसे पहले शुरुआत गुजरात से करते हैं। राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव में बीजेपी ने अहमद पटेल के खिलाफ शुरुआत में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा। दरअसल पटेल के पास जीत के लिए जरूरी वोट से भी ज्यादा वोट थे। लेकिन बाद में बीजेपी ने इस कद्दावर नेता को चुनौती देने की कोशिश कर डाली। ये साफ दर्शाता है कि मोदी और अमित शाह की अगुवाई में बीजेपी कितना बदल चुकी है। ये वो ही बीजेपी है जो 1999 में महज एक वोट से वाजपेयी सरकार को गिरने से नहीं बचा सकी। 1999 का ये वो वाक्या था, जिसने साबित किया था कि बीजेपी ‘चोकर्स’ की इमेज बना चुकी है। लेकिन 3 साल पहले मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और इसके बाद से बीजेपी में असाधारण बदलाव दिख रहे हैं। बार बार कांग्रेस को मात मिली, विरोधी चारों खाने चित हुए। इसके पीछे है मोदी और अमित शाह की पावर पॉलिटिक्स।

आप हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों की ही बात कर लीजिए। बीजेपी इन चुनावों में गोवा और मणिपुर में दूसरे पायदान पर रही थी। इसके बाद भी इन राज्यों में बीजेपी ने कांग्रेस को सरकार बनाने से वंचित रखा था। पूर्वोत्तर में बीजेपी ने नए सहयोगियों को अपने साथ जोड़ा और इसका नतीजा ये है कि अरुणाचल प्रदेश में आज एनडीए सरकार है। उधर नागालैंड में दोस्ताना सरकार है। इसके लिए बकायदा कांग्रेस की ही कुछ रणनीतियों का इस्तेमाल किया गया था। बीजेपी ने कांग्रेस से नेताओं को तोड़कर उत्तराखंड और असम में भी बाजी पलट दी। इन राज्यों में कांग्रेस से आए नेताओं ने बीजेपी की जीत में अहम भूमिका अदा की थी। गुजरात में तो मोदी और शाह की जोड़ी ने नया कमाल कर दिया। अहमद पटेल के खिलाफ कांग्रेस के ही बागी बलवंत सिंह राजपूत को उतार दिया। ये चुनाव बीजेपी की आक्रामक रणनीति का सबसे बड़ा सबूत है। साफ तौर पर बीजेपी ने अटेैक की पोजीशन बनाए रखी।

इससे पहले गुजरात के आंकड़े साफ बता रहे थे कि तीन उम्मीदवार स्मृति ईरानी, अहमद पटेल और अमित शाह आसानी से जीत जाएंगे। क्योंकि शंकर सिंह वाघेला इससे पहले बगावत कर चुके थे। इस बगावत की वजह से कांग्रेस को अपने 44 विधायकों को बेंगलुरु ले जाना पड़ा। वाघेला वो ही शख्स हैं जिन्होंने 1996 में बीजेपी के खिलाफ भी बगावत की थी। इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से उन्होंने बीजेपी की सुरेश मेहता सरकार को गिराया था और खुद मुख्यमंत्री बने थे। उधर सबसे बड़ा खेल तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में हुआ। यूपी में भी सपा और बसपा के MLC को तोड़कर सीएम योगी आदित्यनाथ के कुछ मंत्रियों के लिए जगह बनाई गई। ये भी नई बीजजेपी का ही संकेत थे। अरुणाचल में बीजेपी ने तब सरकार बनाई जब PPA के 43 में से 33 विधायकों ने बीजेपी का ही दामन थाम लिया। बीते 13 सालों में ये दूसरा मौका है जब बीजेपी ने इस संवेदनशील राज्य में सत्ता हासिल की। उधर बिहार में नीतीश कुमार को पाले में लाना भी बीजेपी की ही नई रणनीति का हिस्सा है।


  • MORE UTTARAKHAND NEWS

View More Latest Uttarakhand News
  • TRENDING IN UTTARAKHAND

View More Trending News
  • More News...

News Home