उत्तराखंड की इस बेटी से कुछ सीखिए, पिता किसान हैं, फिर भी रच दिया इतिहास !
Aug 10 2017 5:21PM, Writer:कपिल
‘बेटी नहीं को भविष्य नहीं’ इस बात से तो आप अच्छी तरह से वाकिफ होंगे। ये बेटियां ही हैं, जो आने वाले कल के लिए बेहद जरूरी हैं। ये साबित कर रही हैं कि वो कितनी ऊर्जावान और शक्ति से ओत प्रोत हैं। खास तौर पर उत्तराखंड की बेटियों की बात करें तो हर बार वो ऐसा काम कर रही हैं, कि दुनिया इन बेटियों को सलाम कर रही है। आज हम बात उत्तराखंड की एक और बिटिया की करने जा रहे हैं। ये किसान की बेटी है और पहाड़ों से पलायन रोकने का काम कर रही है। ये बिटिया पलायन तो रोक ही रही है, इसके साथ ही ग्रामीणों की मदद कर रही है। इस बेटी की तारीफ खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भी कर चुके हैं। पिथौरागढ़ के एक गांव गैना बडालू की रहने वाली हैं प्रियंका जोशी। प्रियंका के पिता हरिकृष्ण जोशी किसान हैं। प्रियंका की मां राधा जोशी गांव में आशा कार्यकत्री हैं। हरिकृष्ण जोशी की तीनों बेटियां ही हैं।
इनमें से बीच वाली बेटी है प्रियंका जोशी। प्रियंका ने पिथौरागढ़ में ही अपनी पढ़ाई पूरी की और गणित में एमएससी किया है। हालांकि प्रियंका के परिवार के आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं। इसके बाद भी वो ग्रामीणों की मदद से पलायन रोकने के लिए काम कर रही हैं। प्रियंका आजीविका सुगमकर्ता को तैर पर काम कर रही हैं। वो पॉली हाउस, बीज वितरण, पशुपालन, मासिक बचत योजना, कृषि के लिए उन्नत उपकरण, मशरूम उत्पादन, फूलों की खेती, मुर्गी पालन जैसे कामों को बढ़ावा दे रही हैं। इसके साथ ही वो ग्रामीणों की मदद से हल्दी, पहाड़ी जड़ी बूटी, अदरक, डेयरी उत्पादन, कीवी और स्ट्रॉबेरी के उत्पादन को बढ़ावा दे रही हैं। इसके साथ ही प्रियंका पहाड़ों की संस्कृति को भी बढ़ावा दे रही हैं। प्रियंका का कहना है कि वो बीएससी की पढ़ाई के दौरान से ही पलायन के खिलाफ जंग लड़ रही हैं। प्रियंका की इस सोच को प्रभारी जिलाधिकारी आशीष चौहान ने सराहा।
आशीष चौहान ने उन्हें इस तरफ काम करने के लिए प्रेरित किया। आशीष चौहान ने प्रियंका को आजीविका मिशन से जुड़ने की भी सलाह दी। प्रियंका आज खुश हैं, आर्थिक तौर पर निर्भर हैं और खास बात ये है कि पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए लगातार काम करती जा रही हैं। प्रियंका की तारीफ खुद सीएम त्रिवेंद्र ने की है। उन्होने फेसबुक पेज पर लिखा है कि ‘संसाधनों के अभाव में पहाड़ से पलायन करने वालों के लिए पिथौरागढ़ की बेटी प्रियंका एक मिसाल है। प्रियंका ने मौजूद संसाधनों को ही स्वरोजगार का जरिया बनाया और आज उनकी बदौलत कई महिलाओं की जिंदगी बदल रही है। प्रियंका के इस प्रयास से सबक लेकर स्वरोजगार अपनाने की जरूरत है ताकि पलायन रोका जा सके।’ धन्य हैं पहाड़ की ऐसी बेटियां जो लगातार अपने कामों से नई मिसाल तैयार कर रही हैं। फिलहाल प्रियंका जोशी को राज्य समीक्षा की टीम की तरफ से हार्दिक बधाई।