image: Tungnath Mahadev Temple closed for winters

उत्तराखंड: शीतकाल के लिए बंद हुए तुंगनाथ मंदिर के कपाट, 6 माह मक्कुमठ में विराजेंगे महादेव

कपाट बंद होने के अवसर पर भक्तों ने मंदिर की परिक्रमा की और अखोड़ी और हुडु गांव के हक-हकूकधारियों ने भगवान तुंगनाथ जी की चल विग्रह डोली के साथ चोपता के लिए प्रस्थान किया।
Nov 4 2024 2:55PM, Writer:राज्य समीक्षा डेस्क

आज सुबह 11 बजे शुभ मुहूर्त पर श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। जय बाबा तुंगनाथ के उद्घोष के साथ उत्सव डोली पहले पड़ाव चोपता की ओर रवाना हुई।

Tungnath Mahadev Temple closed for winters

पंचकेदारों में प्रतिष्ठित तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट आज सुबह 11 बजे शुभ मुहूर्त में शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के बाद स्थानीय वाद्य यंत्रों ढोल-दमाऊं और जय बाबा तुंगनाथ के उद्घोष के साथ भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली पहले पड़ाव चोपता की ओर रवाना हुई। कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर समिति ने कर्मचारियों और भक्तों ने विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर की परिक्रमा की और अखोड़ी और हुडु गांव के हक-हकूकधारियों ने भगवान तुंगनाथ जी की चल विग्रह डोली के साथ चोपता के लिए प्रस्थान किया।

चल विग्रह डोली 7 को पहुंचेगी मक्कुमठ

भगवान तुंगनाथ जी की चल विग्रह मूर्ति आज चोपता में विश्राम करेगी, इसके बाद 5 व 6 नवंबर को चलविग्रह डोली दुसरे पड़ाव भुलकण में प्रवास करेगी। इसके बाद ढोल दमाऊ और बाजे गाजों के साथ 7 नवंबर को भगवान तुंगनाथ जी की चल विग्रह डोली को मक्कुमठ स्थित गद्दीस्थल श्री मर्कटेश्वर मंदिर में शीतकालीन निवास के लिए विराजमान किया जाएगा।


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