भगवान कृष्ण के ये चार गुण अपनाएं, जिंदगी जीने का मतलब समझेंगे आप !
Aug 15 2017 7:01PM, Writer:शैलजा
आज हम आपको भगवान कृष्ण के जीवन की उन चार बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें अगर आप अपनी जिंदगी में शामिल कर लें तो आपकी जिंदगी संवर सकती है। बांसुरी वाले कृष्ण कन्हैया के यूं तो काफी रूप हैं। कभी धुन पर गोपियों को नचाते कान्हा, कभी शत्रुओं का दमन करने वाले सुदर्शन चक्रधारी कृष्ण, जंगलों के अनन्य प्रेमी और एक ऐसे दोस्त जिन्होंने कभी भी अपने प्रिय मित्रों का साथ नहीं छोड़ा। ना जाने सुदर्शनचक्र धारी की कितनी भूमिकाएं हैं। ना जाने उनके कितने रूप हैं। लेकिन उनका हर रूप और हर भूमिका आपको नई सीख देती है। ये ऐसी बातें हैं जो आपको जीवन का आनंद देती हैं। कुछ बातें ऐसी हैं जो जीवन का मर्म आपको समझाती हैं और कुछ बातें आपको जिंदगी जीने का मकसद समझाती हैं। सबसे पहले अगर आपको कान्हा की जिंदगी से कुछ सीखना है तो वो है सच्ची दोस्ती। जी हां कान्हा बचपन में सुदामा से बिछड़ गए थे।
इसके बाद उनकी मुलाकात तब हुई थी, जब कन्हैया द्वारकाधीश बन गए थे। इतने साल हो गए और इतने अतंराल के बाद भी कृष्ण अपने दोस्त सुदामा को नहीं भूले। जब सुदामा प्रभु कृष्ण से मिले थे तो फफक कर रो पड़े थे। यानी इतने वर्षों की दूरी भी कृष्ण-सुदामा की दोस्ती को फीकी नहीं कर पाई। जब सुदामा कान्हा से मिले थे तो राजा होने के बाद भी कान्हा ने अपने दोस्त के पैर धोए थे। यहां तक कि सुदामा के पैरों से कांटे भी निकाले। कृष्ण ने अपने मित्र के लिए उस प्यार को बनाए रखा था, जो कई सालों से चला आ रहा था। अगर आपको प्रभु कृष्ण से दूसरी बात सीखनी है, तो वो है कमिटमेंट। प्रभु कृष्ण बाबा नंद के घर में पले बड़े थे। राधा उनसे प्रेम करती थीं, गांव में वो सबसे लाडले थे। लेकिन ये सब त्यागकर वो गोकुल से चले गए थे। ऐसा इसलिए कि उन्हें वो उद्देश्य पूरा करना था, जिसके लिए उन्होंने मनुश्य अवतार लिया था।
जिंदगी में कमिटमेंट को उन्होंने सबसे ऊपर रखा था। तीसरी बात है कि हृदय की पुकार सुनना। इसे आप प्रभु कृष्ण की बांसुरी से भी जोड़ कर देख सकते हैं। भगवान इस दुनिया में कई बड़े उद्देश्य लेकर आए थे। द्वारका में सुशासन, धर्म की स्थापना और राक्षसों का वध। इसके बाद भी उन्होंने अपनी बांसुरी को नहीं छोड़ा। कहा जाता है कि रात में जब अपनों को खोने का दर्द उन्हें सताता था तो वो अपने शिविर में मुरली बजाते थे। कई बार जिंदगी में नैराश्य हमें अलग रास्ते पर ले जाता है, उस वक्त मन का काम हमारे हाथ थाम लेते हैं। चौथी बात है कि भगवान कृष्ण अनन्य प्रेमी थे। प्रभु कृष्ण ने प्रेम में शारीरीक सुंदरता के बजाय आत्मा और समर्पण जैसी चीजों का चुना। उम्र के मामले में राधा प्रभु कृष्ण से बड़ी थी। इसके बाद भी राधा के लिए प्रभु का रोम-रोम समर्पित था। प्रेम को प्रभु कृष्ण ने विवाह और दैहिक संबंधों से ऊपर बताया है।