देवभूमि के एक किसान का बेटा, एशियन बॉक्सिंग में जीता मेडल, ये है पहाड़ी पावर
Aug 17 2017 9:12AM, Writer:सुरेश
उत्तराखंड की भूमि में अब ऐसे ऐसे कद्दावर पनप रहे हैं, जिनकी कहानियां पढ़कर आपको गर्व होगा। खास तौर पर पहाड़ों से ऐसे हुनरमंद खिलाड़ी सामने आ रहे हैं, जो अभी प्रतिभा से विरोधियों को चित कर रहे हैं। ऐसे ही एक कमाल पहाड़ के एक बॉक्सर ने किया है। एक पहाड़ी ने साबित कर दिया है कि अगर सही से ट्रेनिंग मिले तो वो भी गोल्ड जीतने का माद्दा रखता है। हालांकि ये सिल्वर मेडल किसी गोल्ड मेडल से कम भी नहीं जी हां हम बात करे हैं पहाड़ के बेटे सत्येंद्र सिंह रावत की, जो कि चमोली का रहने वाला है। सत्येंद्र सिंह रावत के लिए सम्मान इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि जो लोग कहते हैं कि पहाड़ के युवा खेलों में आगे नहीं बढ़ रहे, उनके लिए ये एक बॉक्सिंग का पंच है। फिलीपींस में आयोजित हुई जूनियर एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप-2017 में सत्येंद्र सिंह रावत ने सिल्वर पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
चमोली के घुनी गांव का रहने वाला है सत्येंद्र सिंह रावत। आपको जानकर हैरानी होगी कि सत्येंद्र सिंह रावत के पिता महेंद्र सिंह रावत किसान हैं। सत्येंद्र जैसे ही अपने घर पहुंचा तो पिता की आंखों में आंसूब डबडबा आए। गरीबी में रह रहे एक परिवार के घर में ऐसा चिराग आया है, जो गरीबी को भगाकर नई रोशनी ले आया है। चमोली पहुंचने पर सत्येंद्र सिंह रावत का जोरदार स्वागत हुआ। इस दौरान उनके पिता को सम्मानित भी किया गया। सत्येंद्र ने फिलीपींस में ख्तम हुई जूनियर एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप-2017 में 81 प्लस किलोग्राम वेट कैटेगरी में ये उपलब्धि हासिल की है। खास बात ये है कि सत्येंद्र सिंह रावत ने 2018 में होने वाली वर्ल्ड जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई भी कर लिया है। पहाड़ों का ये लाल घर पहुंचा तो भव्य स्वागत हुआ। सत्येंद्र सिंह रावत के दीदार के लिए भीड़ उमड़ी थी।
क्षेत्र के लोगों ने उसका माल्यार्पण किया। बैंड के साथ क्षेत्र की महिलाएं खुशी से झूमती नजर आई। सत्येंद्र के कोच ने सूबेदार जीवन सिंह नेगी का कहना है कि सत्तू अभी गोल्ड जीतेगा। सत्येंद्र के घर पहुंचते ही उसकी बहन गंगोत्री ने भाई की कलाई में राखी बांधी। सत्येंद्र को बचपन से ही बॉक्सिंग का शौक था। घर की हालत ठीक नहीं थी तो गांव में ही अपनी प्रैक्टिस शुरू की। इसके बाद राजकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय चौनघाट में खेल शिक्षक जोगेंद्र सिंह रावत ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। यहां से सत्येंद्र सिंह रावतकी सफलता की कहानी शुरू हो गई। दो साल की कड़ी मेहनत के बाद सतद्तू ने महाराणा प्रताप स्पोटर्स कॉलेज में प्रवेश पाया। साल 2014 में उनका गढ़वाल रेजीमेंट की ब्वॉयज स्पोटर्स कंपनी में बतौर सिपाही सलेक्शन हो गया।नेशनल जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सत्येंद्र गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।