image: Teacher kaustubh joshi selected for presidential award

देवभूमि के एक ‘शिक्षक’ से सीखेगा हिंदुस्तान, 5 सितंबर को मिलेगा राष्ट्रपति सम्मान !

Aug 18 2017 12:23PM, Writer:कपिल

कहते हैं माता-पिता के बाद शिक्षक ही एक बच्चे के जीवन का आधार होता है। एक शिक्षक ही बच्चे को जीवन में आग बढ़ने के बारे में बताते हैं और हौसला अफजाई करता है। एक शिक्षक ही तो है, जिसका कर्ज हम कभी नहीं चुका सकते। 21 वीं सदी में शिक्षा का डिजिटलाइजेशन हो रहा है। इस डिजिटल दौर में छात्रों से सामंजस्य बनाने के लिए शिक्षक को छात्रों के मन की बात समझनी होगी। दुनिया आगे बढ़ रही है, ये हर कोई जानता है और एक शिक्षक ही छात्र को दुनिया के कदम से कदमं मिलाकर चलना सिखाता है। ऐसे ही एक शिक्षक हैं उत्तराखंड के कौस्तुभ चंद्र जोशी । जी हां देवभूमि के इस शिक्षक को आज देश देख रहा है। देश के तमाम शिक्षक जानना चाहते हैं कि आखिर कौस्तुभ चंद्र जोशी के पास ऐसा क्या हुनर है कि वो हर किसी के लिए खास बनते जा रहे हैं ? चलिए हम आपको बताते हैं।

सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि देवभूमि के इस द्रोणाचार्य को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस है और इस दिन जोशी जी को ये सम्मान दिया जाएगा। इसकी वजह भी बेहद खास है। पिथौरागढ़ के राजकीय इंटर कॉलेज पत्थरखानी के शिक्षक हैं कौस्तुभ चंद्र जोशी। क्या आप जानते हैं कि इस शिक्षक को ‘इंफॉर्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी’ यानी आईसीटी के कार्यों के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। अब आपको बतातें हैं कि आखिर ये आईसीटी क्या है। जैसा कि हमने आपको बताया कि डिजिटल दौर में शिक्षक को भी डिजिटल होना पड़ेगा, इस बात की मिसाल हैं कौस्तुभ चंद्र जोशी। उन्होंने शिक्षा की अलख जगाने के लिए एक अलग ही फॉर्मूला तैयार किया है जिसके बारे में आपका जानना जरूरी है।

कौस्तुभ चंद्र जोशी ने खुद एक वेबसाइट तैयार की। इस वेबसाइट में कक्षा 9 से लेकर कक्षा 12वीं तक के तमाम विषयों के अध्याय अपलोड किए। इससे छात्रों को पढ़ने में बेहद आसानी हो रही है। कौस्तुभ चंद्र जोशी पिथौरागढ़ के राजकीय इंटर कॉलेज पत्थरखानी में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं। वो मूल रूप से गणाईगंगोली तहसील के लाखतोली गांव के रहने वाले हैं। कुल मिलाकर कहें तो उत्तराखंड के इस द्रोणाचार्य ने अलग ही तरीके से शिक्षा की अलख जगाई। बच्चों को आज के जमाने के हिसाब से चलना सिखाया। बच्चों को सिखाया कि आखिर किस तरीके से वो डिजटल शिक्षा हासिल कर सकते है। उन्होंने हर वक्त बच्चों की हौसला अफजाई की है। सरकार ने ये देखा तो खुश हो गए। इसके बाद ही उन्हें राष्ट्रपति सम्मान के लिए चयनित किया गया है।


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