देवभूमि की 17 साल की बेटी, असंभव लक्ष्य हासिल करने वाली पहली भारतीय !
Aug 21 2017 1:03PM, Writer:सुरेश
देवभूमि की बेटियां, ये बेटियां आज देवभूमि तक सीमित नहीं रह गई हैं। ये बेटियां ही उत्तराखंड की आन बान और शान बन रही हैं। उत्तराखंडी जानते हैं कि बेटियों में क्या दम होता है। हमेशा बेटियों को आदर और सम्मान देने वाले उत्तराखंड को ये ही बेटियां तोहफा भी दे रही हैं। आज हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की बेटी ज्योत्सना रावत की। इस बेटी ने वो कारनामा कर दिखाया, जो आज तक हिंदुस्तान में कोई महिला नहीं कर पाई। सिर्फ 17 साल की ज्योत्सना रावत ने लेह में आयोजित 'लेह अल्ट्रा द हाई' मैराथन में हिस्सा लिया था। ये मैराथन 111 किलोमीटर की होती। आप अंदाजार लगा सकते हैं कि 111 मीटर में ही सांसें फूलने लगती हैं, तो इस बेटी ने 111 किलोमीटर की मैराथन पूरी की। 19 घंटे और 46 मिनट का वक्त लगा ज्योत्सना को ये मैराथन पूरी करने मेंं।
खास बात ये है कि ज्योत्सना ऐसा कारनामा4 करने वा4ली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। ऐसे में आप भी इस बेटिया को हार्दिक बधाई हैं। देवभूमि का गौरव बढ़ाने वाला हर शख्स बधाई का पात्र है। इस दौड़ में ज्योत्सना रावत के पिता यशवंत सिंह रावत ने भी हिस्सा लिया। ज्योत्सना रावत के पिता बीएसएफ में डिप्टी कमांडेंट हैं। पिता ने अपनी बेटी के साथ ये दौड़ पूरी की है। अब आपको बताते हैं कि आखिर ज्योत्सना रावत कौन हैं। ज्योत्सना रावत दून इंटरनेशनल स्कूल की हेड गर्ल हैं। वो कक्षा 12 की छात्रा हैं। इससे पहले ज्योत्सना ने 18 फरवरी को भी इतिहास रचा था। उन्होंने मालदेवता से धनोल्टी तक आयोजित 'गढ़वाल रन' में 74 किलोमीटर की दौड़ पूरी की थी। इसके बाद ही 'लेह अल्ट्रा द हाई' मैराथन का टिकट उन्हें मिल पाया था।
'लेह अल्ट्रा द हाई' मैराथन का आयोजन हर साल होता है। इस बार इस कॉम्पिटीशन का ये आठवां आयोजन था। ज्योत्सना रावत देहरादून के नेहरूग्राम की रहने वाली हैं। उनकी मां ज्योति रावत ने बताया कि ज्योत्सना के पापा लंबी दौड़ के धावक रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रतियोगिताएं जीती हैं। पापा को देखकरही ज्योत्सना ने भी मैराथन शुरू की। लेह में 'लेह अल्ट्रा द हाई' मैराथन में 30 लोगों ने हिस्सा लिया था, जिसमें ज्योत्सना अकेली लड़की थी। ये रेस 17 अगस्त को रात आठ बजे से शुरू हुई। कमाल की बात तो ये है कि ज्योत्सना ने 111 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के लिए 19 घंटे 46 मिनट का वक्त लिया। अगर आपको भी उत्तराखंड की इस बेटी पर नाज है तो ये खबर दुनियाभर में फैलाइए। दुनिया को पता चले कि आखिर उत्तराखंड की बेटियों में क्या दम है।